मथुरा। सिंधी सपूत शहीद हेमू कालाणी के 83वें बलिदान दिवस पर बुधवार को सिंधी समाज ने बच्चों और युवाओं को उनके देशभक्ति से भरे जीवन की प्रेरक कहानियां सुनाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। शहर में किसी प्रमुख चौराहे या पार्क का नाम शहीद के नाम पर रखने की मांग भी उठाई।
बहादुरपुरा स्थित स्वामी लीलाशाह सिंधी धर्मशाला में हुई संगोष्ठी में समाजसेवी रामचंद्र खत्री ने कहा कि आज के युवा जहां फिल्मी कलाकारों को अपना आदर्श मानते हैं वहीं हेमू कालाणी ने कम उम्र में ही शहीद भगत सिंह को अपना आदर्श मान लिया था। मात्र 19 वर्ष की आयु में फांसी चढ़कर उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके जीवन से समाज को त्याग और समर्पण की सीख लेनी चाहिए। व्यापारी नेता गुरमुखदास गंगवानी ने नगर निगम से शहर के किसी चौराहे अथवा पार्क का नामकरण शहीद हेमू कालाणी के नाम पर करने की मांग की।
किशोर इसरानी ने बताया कि 23 मार्च 1923 को जन्मे हेमू कालाणी बचपन से ही राष्ट्रवाद की चेतना से ओतप्रोत थे। अंग्रेजों की ट्रेन रोकने के प्रयास में गिरफ्तार किए जाने के बाद उन्होंने साथियों के नाम नहीं बताए और क्षमा याचना नहीं की। 21 जनवरी 1943 को उन्हें फांसी दे दी गई। कार्यक्रम में सिंधी जनरल पंचायत अध्यक्ष नारायण दास लखवानी, उपाध्यक्ष तुलसीदास गंगवानी, महामंत्री बसंत लाल मंगलानी, सुदामा खत्री आदि मौजूद रहे।