फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mathura News: रिश्वत लेने के आरोप में बंद लिपिक के मामले में आया नया मोड़

विज्ञापन
विज्ञापन
मथुरा। एक वर्ष से मेरठ जेल में बंद बीएसए कार्यालय के वरिष्ठ लिपिक ब्रजराज सिंह के केस में नया मोड़ आ गया है। आरोप है कि ब्रजराज के रिश्तेदारों के साथ मिलकर शिक्षक आलोक उपाध्याय व पुष्पेंद्र सिंह ने शिकायतकर्ता धर्मेंद्र सिंह को बयान वापस लेने के लिए दबाव बनाया।
विज्ञापन


एंटी करप्शन टीम ने धर्मेंद्र सिंह की शिकायत पर लिपिक ब्रजराज सिंह को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ स्टेट बैंक चौराहे से पकड़ा था। ब्रजराज सिंह पर आरोप है कि बेसिक शिक्षा विभाग में चतुर्थ श्रेणी में कार्यरत कर्मचारी रामेश्वर सिंह के एक मामले को निपटाने के लिए रिश्वत मांगी थी। इसकी शिकायत रामेश्वर के पुत्र धमेंद्र ने एंटी करप्शन टीम से की। टीम ने 19 जून 2024 को ब्रजराज सिंह को 25 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया और उसे अपने साथ मेरठ ले गई। यहां टीम ने एंटी करप्शन कोर्ट में उसे पेश किया, कोर्ट ने आरोपी को जेल भेज दिया। तभी से वह मेरठ जेल में बंद है।
इस घटना से पहले शिक्षक आलोक उपाध्याय व पुष्पेंद्र सिंह ने अपने साथियों के साथ मिलकर बीएसए कार्यालय में ब्रजराज सिंह से अभद्रता की थी। लिपिक की शिकायत पर बीएसए ने आरोपी शिक्षकों के विरुद्ध अभद्रता व एससी/एसटी एक्ट में थाना हाईवे में एफआईआर दर्ज करवाई गई थी। इस घटना के कुछ दिन बाद ही ब्रजराज सिंह को एंटी करप्शन टीम द्वारा ट्रैप किया गया था।
विज्ञापन




-

ब्रजराज ने बीएसए के कहने पर रिश्वत लेने की कही थी बात

16 जुलाई 2024 को भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय मेरठ ने ब्रजराज सिंह की जमानत भी खारिज कर दी थी। इसके बाद ब्रजराज ने जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हाईकोर्ट में एक अप्रैल को जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई। ब्रजराज के अधिवक्ता ने यह कहते हुए जमानत देने की अपील की कि यह रिश्वत बीएसए के कहने पर ली गई थी। दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ता धर्मेंद्र के बयान दर्ज कराने के बाद सुनवाई करने के आदेश दिए। मामले की सुनवाई के लिए 28 अप्रैल की तारीख दी गई है।







बीएसए के पत्र का पुलिस प्रशासन ने नहीं लिया संज्ञान

शिक्षक आलोक उपाध्याय और पुष्पेंद्र सिंह के विरुद्ध बीएसए सुनील दत्त ने जिलाधिकारी व एसएसपी को शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की थी। बीएसए इन शिक्षकों पर उन्हें जान से मारने का षड्यंत्र करने का आरोप लगाया था। कार्रवाई न होने से शिक्षकों के हौसले बुलंद थे।



आलोक उपाध्याय और पुष्पेंद्र सिंह का आपराधिक इतिहास

1. वर्ष 2018 में हुए शिक्षक भर्ती घोटाले में एसटीएफ द्वारा आलोक व पुष्पेंद्र को प्रमुख आरोपी मानते हुए जेल भेजा गया था। बाद में दोनों जमानत पर आ गए थे।
विज्ञापन


2. शिक्षक भर्ती घोटाले के आरोप में अन्य आरोपियों के साथ दोनों पर कोतवाली पुलिस द्वारा गैंगस्टर एक्ट का मुकदमा दर्ज किया गया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें