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Mathura News: माताजी गोशाला में विज्ञान व भक्ति का संगम

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राम पंडित
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बरसाना। ब्रजभूमि का कण-कण जहां राधा कृष्ण की लीलाओं से सराबोर है, वहीं सेवा और आस्था की मिसाल भी यहां रची बसी है। इसी सेवा भाव का सबसे जीवंत उदाहरण है बरसाना स्थित माताजी गोशाला। यह गोशाला केवल गोसेवा का केंद्र नहीं, बल्कि विज्ञान और भक्ति का ऐसा अद्वितीय संगम है, जो आज पूरे देश की नजरों में आदर्श बन चुकी है।

करीब 70 हजार गोमाताओं की सेवा करने वाली इस विशाल गोशाला में प्रतिदिन जो आहार तैयार किया जाता है, वह केवल साधारण चारा नहीं, बल्कि अमृत तुल्य पोषण का स्रोत है। यहां संतुलित साइलेज अचार की विशेष व्यवस्था की गई है।
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गोशाला प्रबंधन के राजा बाबा का मानना है कि जिस प्रकार मनुष्य के लिए संतुलित भोजन आवश्यक है, उसी प्रकार गोमाता के लिए भी पौष्टिक आहार उतना ही जरूरी है। इसी सोच के तहत यहां ज्वार और मक्का पर आधारित साइलेज अचार तैयार किया जाता है। इसमें हरे चारे, ज्वार और मक्का को अन्य पौष्टिक तत्वों चना, जौ, मूंगफली की खली, गेहूं की भूसी और गुड़ के साथ मिलाया जाता है। इस संजीवनी मिश्रण से गोमाता न केवल स्वस्थ रहती हैं, बल्कि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।
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इसके अतिरिक्त, गोशाला में अत्याधुनिक फीड प्लांट स्थापित है, जिसमें मक्का, जौ, बाजरा, खल, डीओसी, डीडीजीएस, सीर मेडिसिन, नमक, कैल्शियम आदि से संतुलित साइलेज तैयार किया जाता है। इससे गायों को संपूर्ण पोषण मिलता है और उनकी ऊर्जा क्षमता बढ़ती है। पशु पोषण विशेषज्ञ डॉ. हरजिंदर सिंह का कहना है कि ज्वार और मक्का पर आधारित यह साइलेज अचार पूरी तरह संतुलित है। संवाद
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