मथुरा। अंधाधुंध दोहन से जल स्तर रसातल की ओर जा रहा है। नदियां मैली होती जा रही हैं। इन्हें बचाने की सरकारों को फिक्र नहीं है। संदेश साफ है कि पानी की जो छोटी-छोटी लड़ाई शुरू हो गई है वह विस्तार लेगी। आने वाले समय में सारी दुनिया में सबसे बड़ी लड़ाई पानी के लिए होगी। अवसर जागने का है और यदि वक्त रहते नहीं चेते तो परिणाम भयंकर होंगे। पर्यावरणविद पद्मश्री अनिल प्रकाश जोशी बड़ी यात्रा पर निकले हैं। साइकिल यात्रियों संग वह शनिवार को गोकुल पहुंचे। यहां उन्होंने यमुना की पीर हृदय से महसूस की। उन्होंने कहा कि अफसोस की बात है कि 24 नदियों में यमुना सबसे अधिक मैली है।
पत्रकारों से मुखातिब पद्मश्री जोशी ने कहा कि आने वाले समय में शुद्ध पानी का संकट सामने होगा। कावेरी जल विवाद व घरों में हो रही पानी की किचकिच वर्तमान में इसके उदाहरण हैं। इसको रोकने के लिए जल की गंभीर होती समस्या पर सबको चिंतन करना होगा।
उन्होंने कहा कि देश की 24 नदियों के सर्वेक्षण में यमुना सबसे दूषित पाई गई है। देश की राजधानी, श्रीकृष्ण जन्मस्थली, क्रीड़ा स्थली और ताजमहल के निकट होकर गुजरने वाली यमुना नदी सबसे अधिक दूषित है। नदी पर अतिक्र मण की स्थिति शर्मनाक है। यमुना मर रही है और देश के कर्णधार ऐसा होते देख रहे हैं। उन्होंने देश की जिन 24 नदियाें का गहनता से अध्ययन किया है उसमें वरुणा, यमुना, गंडक, महानंदा अत्यंत दूषित हैं। इनमें यमुना में सर्वाधिक गंदगी है।
पद्मश्री जोशी के साथ साइकिल यात्रा में दयाराम नौटियाल, द्वारिका प्रसाद सेमवाल, मनमोहन नेगी, विनोद खाती, सत्यपाल रमोल, रजना कुकरेती, रेनू सकलानी, दीपक चौधरी, सत्येन्द्र पंवार और पाल सिंह चल रहे हैं।
पद्मश्री से सम्मानित अनिल ने दिया समर्थन
पद्मश्री अनिल प्रकाश जोशी ने गोकुल पहुंचते ही यमुना आंदोलन में सहयोग का ऐलान कर दिया। ब्रज के विरक्त संत रमेश बाबा के सानिध्य में चल रहे यमुना मुक्ति आंदोलन में अब तक किए गए कार्यों से बाबा जयकृष्णदास ने उन्हें अवगत कराया। इसके बाद जोशी ने कहा कि हथिनी कुंड में कैद यमुना को मुक्त कराने के लिए वह हर संभव सहयोग करेंगे। ब्रज में निर्मल यमुना लाने के लिए वह एक मार्च के आंदोलन में साथ रहेंगे। इस दौरान बाबा जयकृष्णदास ने पटुका ओढ़ाकर पद्मश्री जोशी का सम्मान किया। इस अवसर पर पंकज बाबा, हरेकृष्ण, हरिशंकर शास्त्री, विनय दास आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
इतिहास, वर्तमान और भविष्य हैं नदियां...
अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि नदियां हमारा इतिहास, वर्तमान व भविष्य हैं। जहां पानी होता है वहीं बसावट होती है। आज जल प्रदूषण के कारण वर्तमान लड़खड़ा रहा है। नदियाें को उपभोग की वस्तु मान लिया गया है। जल नीति, वन नीति, व जंगल को बढ़ावा देने वाले विभागों के लोगों में कॉऑर्डिनेशन तक नहीं हैं। इससे पर्यावरण का विनाश हो रहा है।