मथुरा। न्यायालयों के आदेशों के बाद भी यमुना में गिर रहे नालों को टेप नहीं किया जा सका है। आज भी मथुरा-वृंदावन के अधिकांश नाले ओवरफ्लो होकर यमुना को प्रदूषित कर रहे हैं। वृंदावन में यमुना को प्रदूषित कर रही कोसी ड्रेन को टेप नहीं किया जा सका है। आरोप है कि रात के वक्त गंदे नालों का पानी यमुना में बहा दिया जाता है। सबसे बड़ी बात है नमामि गंगे के नाम पर 500 करोड़ रुपये बहा दिए गए लेकिन यमुना फिर भी मैली ही रही।
यमुना को प्रदूषण मुक्त करने के लिए आंदोलन भी चल रहे हैं। इस मामले में कई याचिकाएं भी दायर की गईं हैं। यमुना प्रेमी विजय चतुर्वेदी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में भी मामला चल रहा है, लेकिन यमुना के हालातों में सुधार नहीं आ सका है। करीब तीन दशक पूर्व सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में साफ कहा गया था कि वृंदावन में 18 व मथुरा में 19 बड़े नाले सीधे यमुना में गिर रहे हैं। इसके बाद न्यायालय के आदेश पर इन नालों को टेप करने के दावे किए गए, लेकिन धरातल पर दावे झूठे ही हैं।
उन्होंने बताया कि वृंदावन में कोसी ड्रेन को रोके बिना वृंदावन में यमुना को प्रदूषण मुक्त करने की कल्पना करना बेईमानी होगी। कोसी ड्रेन से 20 एमएलडी से अधिक पानी रोजाना गिर रहा है। यही स्थित मथुरा में मसानी नाले की है। मसानी नाले में छह नाले आकर मिलते हैं, जिससे उसका प्रवाह सबसे ज्यादा है। इससे आगे गऊघाट, चिंताहरण नाला सीधे स्वामी घाट पंपिंग स्टेशन पर आकर मिलता है, जो अक्सर ओवर फ्लो होते हुए मिलेगा। विश्राम घाट और ध्रुवघाट पर भी नाले ओवर फ्लो होते देखे जा सकते हैं।
नमामि गंगे के पांच सौ करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी यमुना में प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा है। विगत वर्षों में भी सरकार यमुना शुद्घिकरण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर चुकी है। जबकि 25 करोड़ रुपये में वृंदावन से गोकुल तक 13 किलोमीटर तक भूमिगत पाइप लाइन का प्रोजेक्ट डालकर यमुना को स्वच्छ और निर्मल बनाया जा सकता है। सरकार जनता के धन का दुरुपयोग कर रही है।
- विजय चतुर्वेदी, अध्यक्ष विश्वधर्म रक्षकदल।