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Mathura News: यमुना में गिर रहा सीधे 50 एमएलडी गंदा पानी

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मथुरा। एनजीटी ने मथुरा-वृंदावन में यमुना प्रदूषण नियंत्रण संबंधी आदेशों की अवहेलना पर प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश को नोटिस जारी किया है। साथ ही नगर आयुक्त मथुरा को भी नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। दरअसल एनजीटी की सख्ती के बावजूद मथुरा-वृंदावन में 50 एमएलडी से अधिक गंदा पानी यमुना में गिर रहा है। मथुरा-वृंदावन में यमुना प्रदूषण को लेकर 1998 से अब तक हाईकोर्ट और एनजीटी की निगरानी हो रही है। इसके बावजूद प्रदूषण कम होने के बजाए निरंतर बढ़ रहा है।
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वर्तमान में 50 एमएलडी से अधिक गंदा पानी सीधे यमुना में गिरता है। इसमें मथुरा और वृंदावन ही नहीं कोसी, छाता का औद्योगिक कचरा भी शामिल है। वृंदावन में सुनरख पर कोसी, छाता और शेरगढ़ सहित रुक्मिणी विहार का गंदा पानी सीधे यमुना में जाता है। इसे रोकने की अब तक कोई व्यवस्था नहीं है। वृंदावन के अन्य टेप नालों का पानी भी यमुना में गिर रहा है। दो साल पहले परिक्रमा मार्ग में टूटी सीवर की अब तक मरम्मत नहीं की गई है। इससे शहर का गंदा पानी भी यमुना में जा रहा है।

मथुरा क्षेत्र में मसानी पंपिंग स्टेशन आए दिन उफन जाता है। इससे शहर का करीब 40 प्रतिशत गंदा पानी यमुना में जाता है। इसमें शहर की औद्योगिक इकाइयों का रसायनयुक्त पानी भी शामिल है। अंबाखार नाले का बड़ा हिस्सा, काला पत्थर नाला, औरंगाबाद अप और डाउन नाला भी सीधे यमुना में गिर रहा है। जल निगम की एजेंसियों द्वारा संचालित स्वामीघाट, बंगालीघाट, मसानी पंपिंग स्टेशन भी ओवर फ्लो हो जाते हैं। नगर निगम द्वारा इस पर कोई कार्रवाई न किए जाने से हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। हाईकोर्ट और एनजीटी के आदेश भी यमुना में नालों के इस प्रदूषण को नियंत्रण नहीं कर पा रहे हैं। यही कारण है कि नगर आयुक्त भी अब एनजीटी की कार्रवाई की चपेट में आ गए हैं।
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