मथुरा। ग्राम पंचायतों में गड़बड़ी की शिकायतों पर अधिकारियों ने जांच के आदेश कर दिए। अब शिकायकर्ता और अधिकारी जांच पूरी होने के इंतजार में हैं, लेकिन जांच अधिकारी महीनों से जांच दबाए बैठे हैं। ऐसे ही आठ मामलों में सात जांच अधिकारियों को सीडीओ ने नोटिस जारी किया है। उन्हें जांच पूरी करने के लिए अंतिम अवसर दिया गया है।
ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार की शिकायतों में जिला स्तरीय अधिकारी को जिलाधिकारी द्वारा जांच अधिकारी नामित किया जाता है। इसके बाद जांच रिपोर्ट पर ही पूरा दारोमदार टिका होता है। जांच रिपोर्ट में अगर शिकायत सही पाई जाती है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी, नहीं तो शिकायत निस्तारित कर दी जाएगी। ऐसी ही आठ ग्राम पंचायतों की शिकायत पर सात जिला स्तरीय अधिकारियों को जांच अधिकारी नामित किया गया था। उन्हें एक माह में जांच पूरी करनी थी, लेकिन एक के बाद दो, तीन, चार..और ऐसे ही महीने बीतते गए पर जांच पूरी नहीं हो सकीं।
शिकायकर्ता भी जांच पूरी होने की उम्मीद छोड़ चुके हैं। इसी बीच सीडीओ मनीष मीना ने आठ ग्राम पंचायतों के सात जांच अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। उन्होंने 31 मई तक जांच पूरी करने की चेतावनी दी है। इसके बाद भी अगर जांच पूरी नहीं हुई तो उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
ये हैं ग्राम पंचायतें और जांच अधिकारी
विकास खंड नंदगांव की गांव हाथिया के जांच अधिकारी जिला कृषि रक्षा अधिकारी, मांट की ऊधर ग्राम पंचायत के जांच अधिकारी परियोजना निदेशक, राया की ग्राम पंचायत लालपुर महावन और नौहझील की ग्राम पंचायत अहमदपुर के जांच अधिकारी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, नौहझील की ग्राम पंचायत बिरजूगढ़ी के जांच अधिकारी जिला उद्यान अधिकारी, बलदेव की ग्राम पंचायत मादौर के जांच अधिकारी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, गोवर्धन की ग्राम पंचायत पालीडूंगरा के जांच अधिकारी जिला प्रोबेशन अधिकारी और अनौड़ा ग्राम पंचायत के जांच अधिकारी अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड को नोटिस भेजा गया है।
वर्जन
-मुख्य विकास अधिकारी की ओर से आठ ग्राम पंचायतों की लंबित जांच के मामले में सात जांच अधिकारियों को नोटिस भेजा गया है। उन्हें 31 मई तक जांच पूर्ण करने का अंतिम अवसर दिया गया है। इसके बाद उच्चाधिकारियों के स्तर से ही ठोस कदम उठाए जाएंगे।
-धनंजय जायसवाल, डीपीआरओ।