मथुरा। जीआरपी की टीम ने बुधवार को भाई-बहन सहित पांच अपहरणकर्ताओं को गिरफ्तार इनसे तीन साल की बच्ची बरामद किया। गैंग ने इस बच्ची का सात जनवरी 2023 को जंक्शन के सर्कुलेटिंग एरिया से अपहरण किया था। दिल्ली का यह गिरोह बच्ची से भीख मंगवा रहा था। आरोपियों ने दिल्ली से तीन अन्य बच्चों के अपहरण का भी राज उगला है। दिल्ली पुलिस को इसकी जानकारी दी गई है। सभी आरोपियों को पुलिस ने बुधवार शाम को जेल भेज दिया। इनमें दो आपस में भाई-बहन हैं।
सीओ जीआरपी विजय कुमार ने बताया कि ऑपरेशन मुस्कान के तहत इंस्पेक्टर संदीप कुमार व उनकी स्वाट टीम जनवरी में अपहृत बच्ची की तलाश में लगी थी। बुधवार को मुखबिर से सूचना मिली कि अपहरण करने वाला गैंग जन्मभूमि पर आने वाले श्रद्धालुओं से भूतेश्वर स्टेशन के पास भीख मांग रहा है। इनके पास अपहृत बच्ची भी है। पुलिस की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और गिरोह के सदस्यों को हिरासत में लिया। इनसे से 3 साल की बच्ची गोरा बरामद हुई, उसकी मां फूलवती को पुलिस ने थाने बुलवाया और पहचान के बाद बच्ची उसे सुपुर्द कर दी गई।
सीओ के अनुसार गिरफ्तार अपराधियों की पहचान तिलकराम उर्फ अतुल निवासी गांव बरापुर, पथरा, सिद्धार्थनगर, हाल निवासी आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन, नई दिल्ली, आरिफ उर्फ तोतला निवासी राघवपुर मदई, मीनापुर, मुजफ्फरपुर, बिहार हाल निवासी आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन, पहाड़गंज, नई दिल्ली, तुलसी उर्फ तुलिया पवार निवासी ग्राम उमर गांव पोस्ट बारसी, सोलापुर, महाराष्ट्र हाल निवासी पहाड़गंज, नई दिल्ली, काजल पत्नी राम मिलन निवासी आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन, नई दिल्ली, हीना चौहान पत्नी राजा चौहान निवासी बारसी सोलापुर, महाराष्ट्र हाल निवासी पहाड़गंज, नई दिल्ली के तौर पर हुई है। सभी को जेल भेज दिया है।
गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम
गिरफ्तारी करने वाली टीम में एसएसआई कुलवीर सिंह, स्वाट प्रभारी गौरव कुमार वर्मा, आशुतोष सिंह, हेड कांस्टेबल लोकेश कुमार, सोनवीर सिंह, राहुल कुमार, सुरेश चौधरी, रविशंकर, महिला कांस्टेबल रेखा राजोरिया शामिल रही।
अपनों को भूली, परायों की गोद में खिलखिलाकर खेली
मथुरा। तीन साल की मासूम गौरा नौ माह बाद अपने परिवार के पास पहुंची। इतना लंबा समय बीतने के कारण मासूम अपनी मां तक को भूल गई। जीआरपी थाने की पुलिस ने जब गोरा को उसकी मां फूलवती और नाना के हवाले किया तो उसने उनके हाथ का खाना भी नहीं खाया। इस पर उसे वापस गैंग की महिला हिना चौहान को दिया। इसके बाद हिना के हाथ से बच्ची ने खाना खा लिया।
इंस्पेक्टर संदीप तोमर ने बताया कि हिना चौहान बच्ची को अपने साथ रखती थी। उसे लेकर ट्रेनों, स्टेशन के पास भीख मांगने का काम करती थी। बच्ची बोलने में असमर्थ है। गैंग ने पूछताछ में कई राज स्वीकारे। बताया कि सात जनवरी की रात काजल, तुलसी, आरफि और हिना चौहान चोरी की फिराक में मथुरा स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर सात पर थे। उस वक्त यहां कैमरे नहीं लगे थे। रात को काजल टहलते हुए सर्कुलेटिंग एरिया की तरफ पहुंची। वहां उसे बच्ची की रोने की आवाज सुनाई दी। पास पहुंची तो बच्ची की मां और एक अन्य बच्ची सो रही थी।
रोती हुई बच्ची को चॉकलेट व कुछ रुपयों का लालच देकर वह अपने साथ ले गई थी। यहां से वह अपने साथी आरिफ, अतुल और तुलसी व हिना के पास पहुंची। बच्ची को रात भर स्टेशन पर ही छुपाकर रखा और उसकी मां व पुलिस की गतिविधियों पर निगाह रखी। अगले दिन सुबह बच्ची को लेकर दिल्ली चले गए। हिना शादीशुदा है। मगर, कोई बच्चा नहीं है। ऐसे में उसने उसे पालना शुरू कर दिया। बच्ची का नाम नीमा रख लिया। गिरोह इसके अलावा दिल्ली के कनॉट प्लेस से एक और गुरुद्वारा बंगला साहिब से दो बच्चों का अपहरण कर चुका है। दो बच्चों के बड़े होने पर उन्हें अनाथालय में छोड़ दिया था। एक उनके चंगुल से भाग निकला।
कानों में छेद, कुंडल नहीं, मुखबिर को हुआ शक
इंस्पेक्टर संदीप तोमर ने बताया कि मुखबिर ने एक बच्ची व उसके साथ पांच लोगों को देखा। उसकी निगाह उनकी गोद में बच्ची पर पड़ी। बच्ची के कानों में कुंडल के लिए छेद पाए गए। मगर, उनमें कुंडल नहीं थे। कान के छेद भी बंद होते जा रहे थे। सामान्यतः ऐसा नहीं होता है। जब भी मां-पिता बच्चों के कान छिदवाते हैं। उन्हें कुंडल आदि पहना देते हैं। इसी बात पर मुखबिर का माथा ठनका और गैंग की रेकी करते हुए पुलिस को जानकारी दी।
बच्ची का पिता है जेल में बंद, हरिद्वार का रहने वाला है परिवार
बच्ची की मां फूलवती ने बताया कि परिवार हरिद्वार का रहने वाला है। घटना वाले दिन वह पति से विवाद पर दादी के पास बठिंडा जा रही थी। मगर, पिता ने उसे बताया कि वह खुद भरतपुर निवासी चाचा के घर पर है। ऐसे में हरिद्वार से मथुरा आकर यहां रात में भरतपुर की ट्रेन का इंतजार करते वक्त सो गई थी। उसी दौरान बच्ची के अपहरण की घटना हुई।