मथुरा। प्रदेश सरकार ने भगवान कृष्ण की नगरी मथुरा-वृंदावन को विशिष्ट पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। वृंदावन के 10-12 किलोमीटर लंबे परिक्रमा मार्ग को आकर्षक व सुव्यवस्थित बनाने के लिए 21.28 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी है। इसके लिए एमवीडीए को 10.90 करोड़ रुपये की पहली किस्त भी जारी कर दी है।
वृंदावन परिक्रमा मार्ग के किनारे स्थित भवनों का बाहरी स्वरूप बेहद आकर्षक बनाया जाएगा। इस मार्ग पर स्थित भवनों, दरवाजों और दीवारों को पारंपरिक ब्रज शैली में संवारा जाएगा। परियोजना का उद्देश्य संपूर्ण परिक्रमा मार्ग को एकरूपता और स्थानीय सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप ढालना है, जिससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव हो सके।
परिक्रमा मार्ग पर आवागमन को आसान बनाने के लिए जगह-जगह स्पष्ट और आधुनिक दिशा-सूचक (साइनेज) लगाए जाएंगे। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण को सौंपी गई है।
वृंदावन का परिक्रमा मार्ग कृष्ण भक्तों के लिए गहरी आस्था का केंद्र है। सैकड़ों श्रद्धालु प्रतिदिन राधा-कृष्ण के मंत्रों का जाप करते हुए नंगे पैर इस मार्ग की परिक्रमा करते हैं। यह मार्ग यमुना किनारे के प्राचीन घाटों और प्रमुख मंदिरों (जैसे बांके बिहारी, निधिवन, गोविंद देव) से होकर गुजरता है। इसे पूरा करने में अमूमन 3-4 घंटे का समय लगता है। यह मार्ग उन स्थानों को जोड़ता है, जहां भगवान कृष्ण ने ग्वाल-बालों के साथ अपनी बाल लीलाएं की थीं।
मथुरा-वृंदावन में पर्यटकों की रिकॉर्ड आमद
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार धार्मिक स्थलों के समग्र विकास पर मजबूती से काम कर रही है। मथुरा-वृंदावन की विशिष्ट धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान के कारण यहां देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या में भारी उछाल आया है। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 10.24 करोड़ पर्यटकों ने मथुरा का भ्रमण किया। रंगोत्सव, कृष्ण जन्माष्टमी और राधाष्टमी जैसे विशेष अवसरों पर उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए ब्रज क्षेत्र में लगातार नए पर्यटन विकास कार्य किए जा रहे हैं।