जवाहर बाग हिंसा के सूत्रधार रामवृक्ष यादव को 27 महीनों में 14 नोटिस जारी किए गए। दो नोटिस तो उसने खुद लिए जबकि बाकी को प्रशासनिक अधिकारी जवाहर बाग के गेट पर ही चस्पा कराते रहे। ढाई साल तक ऐसे ही नोटिस की नौटंकी चलती रही। जबकि होना यह चाहिए था कि नोटिस का जवाब न मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाती। फोर्स को लेकर बाग खाली कराया जाता।
रामवृक्ष यादव अपने साथ 500 लोगों की भीड़ लेकर मार्च, 2014 में मथुरा पहुंचा था। उसने यहां जवाहर बाग में कब्जा जमा लिया। जवाहर बाग उद्यान विभाग की संपत्ति है। लिहाजा उद्यान अधिकारी ने 29 अप्रैल, 2014 को रामवृक्ष और चंदनबोस के नाम से नोटिस जारी किया, जिसमें कहा गया कि उन लोगों ने जवाहर बाग पर अवैध कब्जा कर रखा है लिहाजा उसे खाली किया जाए वरना कानूनी कार्रवाई होगी। यह नोटिस रामवृक्ष को रिसीव कराया गया था। इस नोटिस का उसने जवाब भी दिया कि इस मामले पर एक रिट विचाराधीन है लिहाजा फैसले का इंतजार किया जाए। इसके बाद प्रशासन फिर खामोश हो गया।
दूसरा नोटिस 9 फरवरी, 2017 को दिया गया। इसके बाद नोटिस का सिलसिला चलता रहा। उद्यान विभाग ने 6 नोटिस दिए जबकि सिटी मजिस्ट्रेट की तरफ से 8 नोटिस जारी हुए। अधिकारी नोटिस पर नोटिस भेजते रहे लेकिन ये रामवृक्ष यादव तक नहीं पहुंचे। इनको जवाहर बाग के गेट पर चस्पा करा दिया जाता था। हालांकि इन नोटिस का जवाब नहीं मिलने के बाद भी कार्रवाई नहीं की गई।
नोटिस लेने से ही इंकार कर देता था
सिटी मजिस्ट्रेट रामअरज यादव का कहना है कि उनके पीरियड में भी रामवृक्ष को दो नोटिस जारी किए गए थे। इनको जवाहर बाग के गेट पर चस्पा करा दिया गया था। रामवृक्ष नोटिस लेने से इंकार कर देता था। जब कोई नोटिस लेने से इंकार करे या हस्ताक्षर न करे तो उसे तामील ही मान लिया जाता है।
पुलिस ने सभी 14 मुकदमों में दाखिल की चार्जशीट
रामवृक्ष यादव के खिलाफ ढाई साल में 14 मुकदमे दर्ज कराए गए। इनमें मारपीट करने और जान से मारने की धमकी देने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले भी हैं। इनमें चंदन बोस और दूसरे लोग भी नामजद किए गए थे। पुलिस ने सभी मुकदमों में चार्जशीट दाखिल कर दी है।