जिले में 112.412 मीट्रिक टन कूड़े का निस्तारण खुले में हो रहा है। ज्यादातर नगर पालिका और नगर पंचायत इस कूडे़ को आग के हवाले कर निस्तारित कर रही हैं या फिर सड़क किनारे इसे फेंका जा रहा है। हालांकि इस स्थिति के लिए एनजीटी ने वृंदावन पालिका और मथुरा छावनी पर लाखों रुपये का जुर्माना लगाया है लेकिन बदलाव आता नहीं दिख रहा।
प्रशासनकी रिपोर्ट ही कहती हैं कि जिले में कूड़ा निस्तारण का कोई प्रबंध नहीं है। मथुरा नगर पालिका के पास टंचिंग ग्राउंड तो है लेकिन यहां निस्तारण प्रबंध फेल हैं। यहां प्रतिदिन 72 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। मथुरा नगर पालिका 69 मीट्रिक टन कूडे़ के निस्तारण का दावा कर रही है लेकिन निस्तारण की हकीकत सुबह मुख्य मार्गों के किनारे जलते कूडे़ के ढेरों से दिख जाती है।
कूड़ा निस्तारण की हेराफेरी में वृंदावन पालिका के आंकडे़ तो इससे भी ऊपर हैं। जिले में सर्वाधिक गंदे शहर के रूप में चयनित वृंदावन में प्रतिदिन 10 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता होता है। कागजों में इसे शतप्रतिशत ही प्रतिदिन निस्तारित कर दिया जाता है।
लेकिन हकीकत ये है कि वृंदावन में कूड़ा समय से उठता भी नहीं है। पिछले सप्ताह मजिस्ट्रेटों के आकस्मिक निरीक्षण में वृंदावन सबसे अधिक गंदा मिला था।
जिले में कोसीकलां नगर पालिका सहित सभी 13 नगर पंचायतों में कूड़ा निस्तारण के लिए टंचिंग ग्राउंड भी नहीं है। ये सभी निकाय सड़क किनारे कूड़ा फेंककर और उसमें आग लगाकर निस्तारित करती रही हैं।