चर्चित वारदात के बाद गांव की काफी बदनामी हुई है। पूरा गांव इससे आहत है। यहां तक कि गांव में बरसों से रह रहे यादव परिवार भी इस बदनामी के दंश को साफतौर पर महसूस कर रहे हैं।
गांव की कई लड़कियां दूर शहरों और गावों में ब्याही हैं। ग्रीष्मकालीन अवकाश में वह कई दिन पहले ही गांव आ गई थीं। इस घटना के बाद गांव दूरदराज तक चर्चा में आ गया।
इसके बाद इनके पति आकर अपनी पत्नी और बच्चों को गांव से विदा करा ले गए। गांव के यादव परिवारों की बेटियां भी इनमें शामिल हैं।
घटना से जाति विशेष के लोग हो रहे बदनाम
इन परिवारों के लोग भी एकसुर से घटना की निंदा कर रहे थे। उनका कहना था कि अपराधी की कोई जाति या धर्म नहीं होता, लेकिन कुछ सजातीयों की वजह से पूरी बिरादरी बदनाम हो रही है।
प्रधान पति ने बताया कि गांव में सभी जातियां मिलकर रहती हैं। कभी कोई झगड़ा फसाद नहीं हुआ। गांव के मौर्य-शाक्य लोग भी यहां पर बरसों से रहने वाले यादवों के व्यवहार के कायल हैं।
वह कहते हैं कि बाहर से आए लोगों ने गांव का माहौल खराब किया, यह लोग तो उनके परिवार के सदस्य की तरह रहते हैं।
मीना मंच के कक्ष पर दबंग का कब्जा
गांव के सरकारी भवन भी यहां के दबंगों की दबंगई की कहानी बयां करते हैं। उच्च प्राथमिक विद्यालय के मीना मंच कक्ष में गांव के एक दबंग ने कब्जा कर रखा है।
वह नौटंकी पार्टी चलाता है। पार्टी के कुछ कलाकार इसी कक्ष में बैठे थे तो कुछ सो रहे थे। नौटंकी का तमाम सामान कमरे में भरा पड़ा था। वहीं बराबर में ही स्कूल के पुराने भवन में तंबाकू की लकड़ियों के ढेर लगे थे।