महज सोलह-सत्रह साल की उम्र में अगर कोई कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटता नजर आए वह भी तलाक के मुकदमे को लेकर हैरत में पड़ना लाजमी है। पर यह हकीकत है। परिवार न्यायालय और परिवार परामर्श केंद्रों में ऐसे दंपतियों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है।
घर-परिवार या बिरादरी के दबाव में इनकी शादियां तो कच्ची उम्र में हो गईं पर समझ बढ़ते ही यह किशोर दंपति रिश्ता निभाने को तैयार नहीं हैं। अलगाव की इनके पास अलग-अलग वजहें हैं, पर असल मुद्दा एक ही है, दबाव में किए गए रिश्तों को यह निभाना नहीं चाहते हैं।
बिहार में मेडिकल की पढ़ाई कर रही नामिता (परिवर्तित नाम) का विवाह इलाहाबाद के आकाश (परिवर्तित नाम) के साथ 14 वर्ष की उम्र में हो गया। आकाश अब इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है। नामिता ने हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 12 के तहत विवाह शून्य करण का वाद दाखिल किया है। इनका मामला अभी परिवार परामर्श केंद्र में है।
केंद्र की काउंसलर ऋतंधरा मिश्रा के मुताबिक शादी के समय इनकी समझ कच्ची थी। अब यह उस बंधन को निभाना नहीं चाहते हैं। केंद्र में दोनों पक्षों के बीच सुलह-समझौते का प्रयास किया जा रहा है।
बारा तहसील के भी एक नाबालिग दंपति ने विवाह शून्य करण का मुकदमा दाखिल किया है। लड़का पक्ष समाज और गांव वालों पर दबाव डालकर शादी करवाने के कारण अब रिश्ता निभाने को राजी नहीं है।
काउंसलर ऋतंधरा के मुताबिक केंद्र में आठ ऐसी ही आर्जियां आई हैं जिनमें दंपति नाबालिग हैं। कई तो ऐसे हैं जिनके अभिभावकों ने जन्म होते ही विवाह तय कर दिया था। बाद में शादी तो हुई पर जैसे ही दोनों लड़का-लड़की समझदार होते हैं वह रिश्तों को लेकर अपनी पसंद को तरजीह देने लगते हैं।
जिला न्यायालय स्थित मिडिएशन सेंटर के काउंसलर और वरिष्ठ वकील वीके राय के मुताबिक रिश्तों को लेकर युवाओं में समझ बढ़ी है। यही वजह है कि बचपन में माता-पिता द्वारा किए गए वादों को निभाने के लिए तैयार नहीं हैं।
मीडिएशन सेंटर का पहला प्रयास परिवार बचाने का होता है। कोशिश की जाती है कि रिश्ते टूटने के बजाए सुलह-समझौते से बात बन जाए।