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स्वतंत्रता आंदोलन का गवाह रहा आर्य समाज मंदिर

Thu, 23 Feb 2017 11:29 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
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स्वतंत्रता आंदोलन का गवाह रहा आर्य समाज मंदिर - फोटो : अमर उजाला
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यहां स्टेशन रोड स्थित आर्य समाज मंदिर स्वतंत्रता आंदोलन की गतिविधियों का केंद्र बिंदु रहा है। आजादी के आंदोलन के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने बैठक कर लोगों के बीच आजादी की अलख जगाई थी। स्वतंत्रता सेनानी राम प्रसाद बिस्मिल तथा अशफाक उल्ला खां ने भी मंदिर में एक सप्ताह तक प्रवास किया था। आज यह मंदिर पूरी तरह उपेक्षा का शिकार हो चुका है।
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मंदिर के प्रधान महेंद्र आर्य बताते हैं कि इसकी स्थापना 11 जुलाई 1880 को की गई थी। स्वामी दयानंद सरस्वती एक जुलाई को 1880 को मैनपुरी आए थे। उनके प्रोत्साहन के बाद रामबाग निवासी श्याम सुंदर गुप्ता ने कुछ लोगों के साथ मिलकर मंदिर की स्थापना की। एक छोटे से कमरे में बनाया गया मंदिर बाद में आजादी के दीवानों की शरण स्थली बन गया। आजादी के दीवाने यहां रुककर स्वाधीनता आंदोलन की गतिविधियों को अंजाम देते रहे। स्वतंत्रता सेनानी राम प्रसाद बिस्मिल तथा अशफाक उल्ला खां ने भी यहां एक सप्ताह तक रुककर क्रांतिकारी गतिविधियों को अंजाम दिया था।

साहित्यकार लाखन सिंह भदौरिया बताते हैं कि क्रिश्चियन इंटर कालेज में छात्रों को साथ लेकर राम प्रसाद बिस्मिल ने ब्रिटिश हुकूमत का झंडा जलाया था। मैनपुरी षडयंत्र केस के क्रांतिकारियों के साथ मिलकर आजादी के आंदोलन को आगे बढ़ाया था। राम प्रसाद बिस्मिल तो कई दिनों तक कोसमा में अपनी बहन के यहां भी रुके थे। साहित्यकार श्रीकृष्ण मिश्र बताते हैं कि आजादी के दीवाने महात्मा गांधी 20 सितंबर 1929 को मैनपुरी आए थे। आर्य समाज मंदिर में ही क्रांतिकारियों की बैठक कर आजादी की अलख जगाई थी। उनको नगर के लोगों ने आंदोलन के लिए एक थैली भी भेंट की थी। करहल रोड स्थित एक बगिया में रात्रि विश्राम करने के बाद महात्मा गांधी 21 सितंबर की सुबह फर्रुखाबाद चले गए थे।
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आर्य समाज मंदिर के प्रभारी शिव नरायन दुबे कहते हैं आजादी के आंदोलन की धरोहर रहा आर्य समाज मंदिर आज उपेक्षा का शिकार है। धरोहरों को जीवित रखने में सक्रियता दिखाने वाली सरकारें मंदिर की ऐतिहासिकता की ओर से अभी तक मुंह मोड़ रही हैं। आर्य समाज मंदिर को पर्यटन स्थल बनाया जाना चाहिए।
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