अखंड सुहाग के प्रतीक त्योहार करवाचौथ पर बाजारों में सुबह से ही रौनक रही। सुबह से निर्जला व्रत रखी विवाहिताओं ने रात को चांद का दीदार करने के बाद व्रत तोड़ा। वहीं बाजारों में भी जमकर खरीदारी की। ब्यूटी पार्लरों में भी महिलाओं की खासी भीड़ देखी गई।
सराफा बाजार में गहने खरीदने के लिए महिलाओं का तांता लगा रहा। सराफा कारोबारी हमीद के अनुसार सबसे अधिक मंगलसूत्र और आधुनिक अंगुठियों की मांग रही। उन्होंने कहा कि इस बार सोने का भाव अधिक रहने से पिछले वर्ष की तुलना में इस बार बिक्री कम हुई है। वहीं साड़ियों के दुकानों पर भी महिलाओं की अच्छी खासी भीड़ नजर आई।
लेनगंज, बजरिया, सदर बाजार, बजाजा बाजार में महिलाएं खरीदारी के लिए उमड़ी तो जाम जैसे हालात बन गए। महिलाओं का बाजार कहा जाने वाली बजरिया में तो तिल रखने तक को जगह नहीं थी। पुलिस को यातायात सुचारु रखने में पसीने छूट गए। सुहागिनों ने हाथों में मेहंदी रचवाई।
दिन भर करती रहीं चांद का दीदार
मैनपुरी। सजने संवरने के बाद विवाहिताएं चांद के दीदार का इंतजार करती रहीं। चांद निकला तो दिन भर निर्जला व्रत की थकान दूर हो गई और विवाहिताओं ने पहले चंद्रमा और फिर पति की पूजा-अर्चना कर पति के दीर्घायु होने की कामना की। पूजा के बाद पानी और भोजन कर व्रत तोड़ा।
नवविवाहितों में दिखा उत्साह
मैनपुरी। करवाचौथ का व्रत रखने को लेकर नवविवाहितों में खासा उत्साह दिखा। पहली बार व्रत रखने के चलते खुशी के मारे फूले नहीं समा रही थीं। इतना ही नहीं किसी ने लहंगा चुन्नी को पहना तो किसी ने नई साड़ी पहन कर व्रत रखा।
सामूहिक रूप से मनाया करवाचौथ का पर्व
मैनपुरी। पंजाबी कालोनी में महिलाओं ने सामूहिक रूप से महिला सत्संग भवन में करवाचौथ का पर्व मनाया। इस दौरान सुहागिनों ने करवाचौथ की कहानी सुनकर और थाली बदलने की रस्म पूरी कर पूजा की। वहां सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना करने के बाद चंद्रमा का अर्घ्य दिया।
कस्बों में परंपरागत रूप से मनाया करवाचौथ
करहल/भोगांव/घिरोर/बेवर/कुरावली/किशनी/अजीतगंज। कस्बों में भी करवाचौथ का त्योहार परंपरागत रूप से मनाया गया। सुहागिनों ने व्रत रखकर पति के दीर्घायु की कामना की। देहात में बाजार में करवाचौथ के कैलेंडर और सीकों की खूब बिक्री हुई। पूरे दिन भूखे और निर्जला रहने के बाद चांद निकलने की खुशी महिलाओं के चेहरों पर झलक पड़ी। उन्होंने पहले गौरा जी की पूजा थाल सजा कर की, तत्पश्चात चंद्रमा निकलने पर अर्घ्य देकर सर्वप्रथम पति को भोजन कराया उसके बाद अपना व्रत खोला।