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यूपी: गंदगी और अतिक्रमण से घुट रहा 52 तालाबों का दम, मवेशियों के साथ इंसानों की जान को भी पैदा हुआ खतरा

Sun, 25 Oct 2026 07:09 PM IST
Arun Parashar राघवेंद्र सिंह गहलाैत, संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी

सार

टीम ने कुछ स्थानों पर ठोस अपशिष्ट तालाबों में डाले जाने और उनके आसपास भवन आदि बनाए जाने की स्थिति भी मिली। इससे तालाबों के प्राकृतिक स्वरूप और जल गुणवत्ता पर असर पड़ने की आशंका है।
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तालाब। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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मैनपुरी जिले में तालाबों पर अतिक्रमण और उनमें कूड़ा-कचरा डाले जाने से जल प्रदूषण का खतरा पैदा हो गया है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में मैनपुरी और भोगांव तहसील के 52 तालाबों में से अधिकांश के पानी की गुणवत्ता खराब पाई गई है। इससे जलीय जीवों के साथ, मवेशी और इंसानों की जान पर खतरा पैदा हो रहा है।
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बोर्ड के जुलाई और अगस्त माह में किए गए सर्वे में तालाबों में बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) और केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (सीओडी) का स्तर तय मानकों से काफी अधिक मिला। जांच में 35 तालाबों में सीओडी का स्तर 50 से अधिक (अधिकतम 440 मिलीग्राम प्रति लीटर) दर्ज किया गया। 33 तालाबों में बीओडी का स्तर 20 से अधिक (अधिकतम 110 मिलीग्राम प्रति लीटर) पाया गया। जांच के दौरान छह तालाब पूरी तरह सूखे मिले।

52 तालाबों के पानी की जांच, 40 भोगांव तहसील में
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने मैनपुरी और भोगांव तहसील के 52 तालाबों का सर्वे किया। इनमें भोगांव तहसील के 40 और मैनपुरी तहसील के 12 तालाब शामिल थे। टीम ने 23, 27 और 29 जुलाई तथा 3, 6, 11, 13 और 18 अगस्त को तालाबों के पानी के नमूनों की जांच के साथ आसपास की स्थिति का सर्वेक्षण किया। इसके बाद तैयार रिपोर्ट में तालाबों में प्रदूषण और अतिक्रमण से संबंधित स्थितियां दर्ज की गईं।
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बरसात के पानी से पहुंच रही गंदगी
रिपोर्ट के अनुसार, कई तालाबों में वर्षा जल के साथ आसपास के क्षेत्रों की घरेलू गंदगी पहुंच रही है। कुछ स्थानों पर ठोस अपशिष्ट तालाबों में डाले जाने और उनके आसपास भवन आदि बनाए जाने की स्थिति भी मिली। इससे तालाबों के प्राकृतिक स्वरूप और जल गुणवत्ता पर असर पड़ने की आशंका है।

प्रदूषण और अतिक्रमण से बिगड़ा प्राकृतिक स्वरूप
रिपोर्ट के अनुसार, मैनपुरी और भोगांव तहसील के तालाबों में बारिश के पानी के साथ आसपास के क्षेत्रों की घरेलू गंदगी और ठोस अपशिष्ट बहकर पहुंच रहा है। इसके अलावा कई तालाबों के कैचमेंट एरिया (भराव क्षेत्र) में पक्के निर्माण कर अतिक्रमण कर लिया गया है। पानी में जैविक गंदगी जमा होने से घुलित ऑक्सीजन का स्तर तेजी से घट रहा है, जिससे जलीय जीवों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है।

मलजनित बैक्टीरिया के संकेत
जांच में पानी के भीतर टोटल कोलीफॉर्म (टीसी) की मात्रा अधिकतम 94 हजार और फीकल कोलीफॉर्म (एफसी) की मात्रा 27 हजार तक पाई गई। ये बैक्टीरिया मानव और पशुओं के मल से होने वाले प्रदूषण के प्रत्यक्ष सूचक हैं। इससे आसपास के पेयजल स्रोतों के भी दूषित होने और टाइफाइड व दस्त जैसे संक्रामक रोग फैलने का अंदेशा है। इस पानी के संपर्क में आने से जानवर और इंसान दोनों में चर्म रोग फैलने का खतरा बना हुआ है।

करीमगंज में संक्रमण से मौतों का दावा
करीमगंज गांव के कश्यप ऋषि पांडेय ने दावा किया कि वर्ष 2020 में गांव के तालाब और दूषित जल के कारण फैले संक्रमण से गांव में सैकड़ों लोग वायरल व अन्य बीमारी से पीड़ित हुए, जिसमें से करीब एक महीने के भीतर 40 से 42 लोगों की मौत हो गई थी, जिसमें उनके परिवार के सदस्य भी शामिल थे। अभी भी कई बार नलों में पीला पानी आ जाता है। हालांकि इन मौतों और प्रदूषण के संबंध की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

देवी नगर में भी बीमार होने की शिकायत
कुरावली के देवी नगर निवासी पूर्व जिला पंचायत सदस्य अनार सिंह ने बताया कि गांव के तालाब के आसपास गंदगी फैली है। इससे करीब 20 से 25 घरों में लोग बुखार, उल्टी और दस्त से पीड़ित हैं। उनके परिवार में भी कई दिन से लोग बीमार हैं।


प्रदूषण के तत्व

तय मानक

पाया गया अधिकतम स्तर

सीओडी (COD)

20 से 40

440 मिलीग्राम प्रति लीटर

बीओडी (BOD)

20

110 मिलीग्राम प्रति लीटर

टोटल कोलीफॉर्म

5,000

94,000

फीकल कोलीफॉर्म

1,000

27,000



- 52 तालाबों की जांच: भोगांव तहसील के 40 और मैनपुरी तहसील के 12 तालाब शामिल।
- 35 तालाबों में सीओडी 50 से अधिक: अधिकतम स्तर 440 मिलीग्राम प्रति लीटर तक दर्ज।
- 33 तालाबों में बीओडी 20 से अधिक: अधिकतम स्तर 110 मिलीग्राम प्रति लीटर तक मिला।
- छह तालाब सूखे मिले: जांच के दौरान इनमें पानी नहीं था।

तालाब के पानी में किसी भी तरह का प्रदूषित पदार्थ नहीं जाना चाहिए। वह चाहे घर से निकला हुआ हो या जानवरों का। पानी में ऑक्सीजन की मात्रा ज्यादा होगी तो जलीय जीव जीवित नहीं रह पाएंगे। पानी में कोलीफॉर्म की अधिक मात्रा इंसान और जानवरों दोनों के लिए घातक है। -भुवन प्रकाश, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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तालाबों के संरक्षण और उनके जीर्णोद्धार के लिए तहसील स्तर पर टीमें गठित की गई हैं। यह टीमें साफ-सफाई कराने के साथ ही उन्हें अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई कर रही हैं। -डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी, जिलाधिकारी

 
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