मैनपुरी में एक दशक पुराने दोहरे हत्याकांड में सोमवार को अपर सत्र न्यायाधीश जहेंद्र पाल की कोर्ट संख्या-4 ने फैसला सुनाया। मुकदमे के कुल चार आरोपियों में से तीन को दोषी करार दिया गया। दो को हत्या और शव छिपाने के दोष में आजीवन कारावास और 60-60 हजार रुपये और एक दोषी को सात साल कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। एक महिला आरोपी को बरी कर दिया गया है।
यह मामला घिरोर थाना क्षेत्र से जुड़ा है। 17 और 18 जनवरी 2015 को दो अज्ञात शव बरामद हुए थे। बाद में इन शवों की पहचान लक्ष्मीकांत निवासी छविसा, फतेहाबाद, आगरा और उसी गांव उसके चचेरे भाई पप्पू उर्फ राजकुमार के तौर पर हुई। पुलिस ने मृतकों के परिजन के बयानों के अनुसार खुलासा किया था कि पप्पू उर्फ राजकुमार के विरमा देवी निवासी रामगर, फिरोजाबाद और ऊषा देवी निवासी कीलानी पुलिया, तखरऊ कोठी, फिरोजाबाद से भी संबंध थे। विरमा की शादी उसकी इच्छा के विरुद्ध हुई थी। वहीं, ऊषा के पति की मृत्यु हो चुकी थी।