इसे दुर्भाग्य नहीं तो भला क्या कहेंगे, दो बेटे बेटियां और पोते पोतियों का भरा पूरा परिवार, फिर भी आलीपुर खेड़ा की रहने वाली 90 वर्षीय सईदन को लावारिस मौत मिली। 22 अगस्त को वृद्धा दवा लेने शहर आई थीं, तबियत बिगड़ने के बाद खुद ही जिला अस्पताल में भर्ती हुईं, रविवार की सुबह जब उनकी सांसे थम गईं। तब परिजनों को जानकारी हुई। पुलिस ने पोस्टमार्टम कराया।
थाना भोगांव क्षेत्र के आलीपुर खेड़ा की रहने वाली 90 वर्ष की सईदन मंसूरी के पति की करीब 17 वर्ष पहले मौत हो चुकी थी। पति के जाने के बाद से ही वह बीमार रहने लगी थीं। उनके दो बेटे नौशाद और दिलशाद, दो बेटियां हैं। इसके अलावा सईदन के 14 नाती और नातिन का भरा पूरा परिवार था। वह कमजोर हो चुकी थीं, मगर फिर भी अपनी दवा लेने के लिए मेडिकल कॉलेज सैफई तक चली जाती थीं। 22 अगस्त की सुबह वह घर से दवा लेने की बात कह कर निकलीं थीं। रात को उन्हें बेहोशी की हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, तभी से उनका इलाज चल रहा था। मगर, भरा पूरा परिवार होने के बाद भी आखिरी समय में कोई देखरेख करने वाला नहीं था।
रविवार की सुबह करीब 5.50 बजे सईदन ने आखिरी सांस ली, मगर इस वक्त भी परिवार का भी सदस्य उनके पास नहीं था। मीमो से जानकारी मिलने के बाद पुलिस आई और वृद्धा की पहचान के प्रयास शुरू किए। इस बीच सईदन को तलाश कर रहे नौशाद को इस बारे में पता चला, जिला अस्पताल पहुंचने पर पता चला कि मां का शव तो मोर्चरी में लावारिस रखा हुआ है। शिनाख्त होेने के बाद पुलिस ने पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूर्ण कराई, इसके बाद वृद्धा का शव अंतिम संस्कार के लिए परिजनों के सुपुर्द कर दिया।