परिणामों की पवित्रता का नाम ही शौच धर्म: साधना दीदी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
नगर के जैन मंदिरों में पर्यूषण पर्व के चलते प्रवचन चल रहे हैं। सुबह अभिषेक व पूजन किया गया। शाम को आरती एवं भक्ति की गई। वहीं शुक्रवार को देर शाम तक उत्तम शौच धर्म पर प्रवचन हुए।
श्री आदिनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में बाल ब्रह्मचारी साधना दीदी ने कहा कि पवित्रता, परिणामों की पवित्रता का नाम ही शौच धर्म है, लेकिन शौच का अकेला, उत्तम विशेषण न लगा हो तो क्रोध के साथ ही शौच होता है और लोभ के साथ भी शौच होता है। उन्होंने कहा कि लोभी व्यक्ति की राग कषाय उतनी होती है कि वह देना नहीं जानता है पर मिल जाए तो ले लेता है। मायाचारी व्यक्ति तो देकर लेना भी जानता है।
उन्होंने कहा कि लोभी व्यक्ति धन की रक्षा पहरेदार की तरह करता है, लेकिन इसे भोग नहीं सकता है। लोभी व्यक्ति का धन मायाचारी व्यक्ति ही ले पाते हैं। वह मीठी-मीठी बातें कर उसका ज्यादा से ज्यादा धन हड़प लेते हैं। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्र्रम में बच्चों के बीच नृत्य प्रतियोगिता हुई। इसके बाद प्रश्नमंच कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम का संचालन डा. सौरभ जैन, कमल जैन ने किया। इस मौके पर विजय जैन, सुशील जैन, सौरभ जैन, चक्रेश जैन, हेमंत जैन, संजीव जैन, संजय जैन, सौरभ जैन, अजय जैन आदि मौजूद रहे।