कान्हा के स्वागत को बाजार सजने लगे हैं। दुकानों पर लड्डू गोपाल के स्वरूपों के साथ ही आकर्षक वस्त्र आदि भी बिकने लगे हैं। यही नहीं झांकियां सजाने के लिए भी बड़ी संख्या में सजावटी खिलौनों से दुकानें अटी पड़ी हैं। इस बार राहत की बात यह है कि पिछले वर्षों की तुलना में चाइनीज के स्थान पर देसी आइटमों की मांग अधिक है।
चार दिन बाद कान्हा के अवतरण का दिन जन्माष्टमी मनाया जाएगा। इसके लिए घरों और बाजारों में अभी से तैयारियां होने लगी हैं। दुकानों पर जहां विभिन्न आकार और कीमत के लड्डू गोपाल के स्वरूप बिक्री के लिए मौजूद हैं। वहीं झांकियां सजाने के लिए भी बड़ी संख्या में खिलौने बाजार में आ चुके हैं। इनमें मिट्टी से लेकर प्लास्टिक और धातु तक के खिलौने शामिल हैं। दुकानदार भरतकुमार का कहना है कि इस बार ग्राहकों में चाइनीज आइटम को लेकर विशेष सतर्कता है। खरीदने से पहले पूछते हैं कि चाइनीज है या देश में बना हुआ है। देशी बताने पर ही खरीद रहे हैं। इसके अलावा इस बार झांकी सजाने के लिए मिट्टी के खिलौनों की भी खासी मांग है। मिट्टी के खिलौने बनाने वाले बालकिशन प्रजापति ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार अधिक आर्डर आया है। लोगों में एक बार फिर मिट्टी के खिलौनों की मांग में खासा इजाफा हुआ है। वे इसकी वजह चाइनीज खिलौने बाजार में कम मात्रा में आना मान रहे हैं। फिलहाल कुछ भी हो लोगों ने घरों में कान्हा के स्वागत की तैयारियां शुरू कर दी हैं।