देवोत्थान एकादशी पर घर-घर आंगन में अल्पनाए बनाईं और विधि विधान से पूजा अर्चना की गई। पूरे दिन शहर भर में जमकर गन्ना और सिंघाड़ा की बिक्री हुई। मंहगा होने के बाद भी देर शाम तक गन्ना, सिंघाड़ा खरीदने के लिए लोग बाजार में आते रहे।
देवोत्थान पर किसानों तथा दुकानदारों ने ट्रेक्टरों से गन्ने लादकर शहर में कई स्थानों पर दुकानें लगाईं। घंटाघर चौराहा, करहल चौराहा, बड़ा चौराहा, करहल रोड, आगरा रोड, स्टेशन रोड, कचहरी रोड पर जमकर बिक्री हुई। हरा गन्ना 20 से 30 तथा लाल गन्ना 30 से 50 रुपये तक में बेचा गया। हरा सिंघाडा 20 रुपया, पका सिंघाड़ा 30 रुपया, उबला सिंघाड़ा 40 से 50 रुपये किलो तक में बेचा गया। इसके बाद भी लोगों ने गन्ना और सिंघाड़ा की जमकर खरीदारी की। घरों में अल्पनाएं और चौक बनाकर देवोें की विधि विधान से पूजा अर्चना की गई।
यह है मान्यता
देवोत्थान पर्व की मान्यता है कि भगवान विष्णु क्षीर सागर में शयनकाल समाप्त कर देते हैं। प्रकृति को आल्हादित करने के लिए अपनी भार्या श्री और लक्ष्मी को समस्त ब्रह्मांड में ऐश्वर्य बिखेरने के लिए भेज देते हैं। शुभ कार्यों और विवाह की इसी दिन से शुरुआत हो जाती है। देवोत्थान पर्व ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।