यदि जिले के सरकारी कार्यालयों में आग लगी तो यहां कुछ भी शेष नहीं बचेगा। कारण सुरक्षा उपकरण तो दूर विभिन्न कार्यालयों में फाइलें आदि तक सही प्रकार और सुरक्षित रूप से नहीं रखी गई हैं। ऐसे में हादसा होने पर कोई भी रिकार्ड सुरक्षित नहीं बच सकेगा।
बता दें कि बुधवार रात आगरा के संजय प्लेस स्थित जीवन बीमा निगम की बहुमंजिला इमारत में आग लग गई थी। वहां पर अग्निशमन के तमाम साधन होने के बाद भी निगम के कर्मचारियों का एवं अन्य रिकार्ड जलकर राख हो गया। आग बुझाने में ही घंटों लग गए। यदि ऐसी कोई घटना जिले के किसी सरकारी कार्यालय में होती है तो वहां पर कुछ भी नहीं बचेगा। चाहे फिर वह रिकार्ड हो या अन्य कोई सामान।
कलक्ट्रेट परिसर में स्थित एआरटीओ कार्यालय का रिकार्ड जिस स्थान पर रखा है उसे देखने पर लगता है मानो किसी कबाड़ी की दुकान में आ गए हैं। जमीन से लेकर दीवार किनारे फाइलों का ढेर लगा हुआ है। इनकी सुरक्षा तक का कोई इंतजाम नहीं है। यदि यहां पर आग लगती है तो हजारों लाखों गाड़ियों के रिकार्ड का बचना असंभव है। इतना महत्वपूर्ण रिकार्ड होने के बाद भी जहां फाइलें रखी हैं वहां पर अग्निशमन उपकरण तक नहीं है। यही नहीं आग बुझाने के सामान्य साधन तक नहीं है। इस संबंध में पूछने पर एआरटीओ कार्यालय का कोई भी अधिकारी कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं है।
कलक्ट्रेट स्थित भू-अभिलेखागार की हालत भी काफी नाजुक है। यहां पर भी सीसी टीवी कैमरे तो लगे हैं लेकिन कहीं भी अग्निशमन उपकरण नहीं है। सैकड़ों सालों का जमीन से संबंधित रिकार्ड यहां रखा जाता है। इतना संवेदनशील विभाग होने के बाद भी यहां पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। यही नहीं आसपास पानी या बालू तक की बाल्टी यहां नहीं टांगी गई है। ऐसे में यदि यहां पर आग लगती है तो पूरे जिले का सैकड़ों सालों का जमीन से संबंधित रिकार्ड जलकर राख हो जाएगा।
कलक्ट्रेट स्थित एसपी कार्यालय के पीछे स्थित पुलिस विभाग का भी यही हाल है। यहां भी आग लगने पर सुरक्षा के कोई साधन नहीं हैं। फाइलें एक मेज पर रखी रहती हैं। यहां इतनी गनीमत जरूर है कि कार्यालय के सामने एक सबमर्सिबल पंप लगा हुआ है। इसके चलते यदि आग लगती है तो शुरुआती समय में पानी से बुझाया जा सकता है।
नहीं हैं हाइड्रेंट प्वाइंट
दमकल पहुंचने के बाद भी आग बुझाने में खासी मशक्कत करनी पड़ेगी।
सभी विभागों के विभागाध्यक्षों को अग्निशमन के उपायों को दुरुस्त रखने के लिए पत्र लिख दिया गया है। साथ ही इस संबंध में शासन को भी पत्र लिखकर अवगत कराया जा चुका है।
-मनु शर्मा, सीएफओ मैनपुरी