कचहरी रोड स्थित कबीर आश्रम में प्रवचन का आयोजन हुआ। इसमें महंत अमर साहेब ने कहा कि पांच तत्व का ये शरीर एक पुतला रूपी है। इसका मनुष्य नाम रखा गया है।
प्रवचन में महंत अमर साहेब ने कहा कि पूरे जीवन में मनुष्य बड़े गुमान घूमता है। इसमें से चेतन शक्ति के बिछुड़ जाने से ये विकल हो जाएगा। सत्य के अभाव में केवल मिट्टी का पिंड रह जाएगा। जीवन रहते अगर सत्य का बोध नहीं कर पाया तो सारा जीवन मिट्टी के समान है। जीवन-जवानी पद धन के मद में सब क्षण भर में छूट जाएगा। हमारे जीवन के वही अमूल्य क्षण हैं और वहीं सांसे।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सूर्य के निकलते ही रात्रि चली जाती है। इसी प्रकार सत्य आत्म ज्ञान के प्रकाश से मन के अज्ञान का सारा अंधेरा मिट जाता है। इसी के चलते सभी महापुरुषों ने सद्ग्रंथो में सत्संग की महिमा पर जोर दिया और कुसंग की निंदा की। कुसंग का प्रभाव इतना तीब्र होता है पानी का बहाव ऊपर से नीचे की ओर स्वाभाविक होता है।