फोटो 25 आगरा रोड स्थित रामलीला पंडाल। संवाद
मैनपुरी। 200 साल से अधिक पुरानी शहर की रामलीला ने समय के साथ अपना स्वरूप भले बदला हो लेकिन परंपरा आज भी कायम है। लालटेन की रोशनी में बैलगाड़ी पर भगवान श्रीराम की बरात निकलती थी और कुड़कुड़ियों की धुन पर भजनों के बीच श्रद्धालु झूमते थे। अब रामलीला हाईटेक हो चुकी है।
आगरा रोड स्थित मैदान में रात को होने वाले मंचन में डिजिटल स्क्रीन, आधुनिक प्रकाश और साउंड सिस्टम का इस्तेमाल हो रहा है। राम बरात में एलईडी से सजे रथ, आकर्षक झांकियां और हाईटेक बैंड आकर्षण का केंद्र होंगे। रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों ने बताया कि 200 वर्ष से अधिक समय से लगातार रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। रामलीला के इतिहास का प्रमाण वर्ष 1919 के दस्तावेज में भी मिलता है। कमेटी के अध्यक्ष महेशचंद्र अग्निहोत्री कहते हैं कि तकनीक और व्यवस्थाएं बदली हैं लेकिन रामलीला की मूल परंपरा को कायम रखा गया है। मंत्री सुरेश चंद्र बंसल बताते हैं कि पहले सीमित साधनों में भी रामलीला लोगों के लिए बड़े आकर्षण का केंद्र थी। अब तकनीकी संसाधनों से लीलाओं को अधिक प्रभावी बनाया गया है।
वर्ष 1919 में महाराजा तेजसिंह के वंशज ने दी थी भूमि
रामलीला कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष वीर सिंह भदौरिया ने बताया कि महाराजा तेजसिंह की वंशज रानी रत्नेश कुमारी ने वर्ष 1919 में रामलीला कमेटी को भूमि उपलब्ध कराई थी। दस्तावेज में उल्लेख है कि यहां लंबे समय से रामलीला का आयोजन होता आ रहा था और इसकी निरंतरता के लिए भूमि दी गई।
फोटो 25 आगरा रोड स्थित रामलीला पंडाल। संवाद
फोटो 25 आगरा रोड स्थित रामलीला पंडाल। संवाद
फोटो 25 आगरा रोड स्थित रामलीला पंडाल। संवाद
फोटो 25 आगरा रोड स्थित रामलीला पंडाल। संवाद