प्रदेश के 128 स्कूलों सहित शिक्षा निदेशालय और 12 उपनिदेशक कार्यालयों में पहले चरण में मशीनें लगाई जाएंगी।
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टीईटी के फर्जी अंकपत्रों के सहारे मैनपुरी जनपद में 12 अध्यापकों के नौकरी करने की शिकायत है। डीएम ने इन सभी अध्यापकों के वेतन भुगतान पर रोक लगा दी है। वहीं बीएसए और राजस्व अधिकारी की संयुक्त टीम को जांच सौंपी है। बताया कि जांच में उक्त शिक्षक दोषी मिले, तो अब तक भुगतान हुए वेतन की रिकवरी की जाएगी।
बता दें कि लंबी जद्दोजहद के बाद प्राथमिक स्कूलों में दो वर्ष पूर्व 72 हजार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी की गई थी। वहीं उच्च प्राथमिक स्कूलों में गणित, विज्ञान के 29 हजार भर्ती के तहत जिले में 340 पदों पर 247 शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। 12 शिक्षक हाईकोर्ट के आदेश पर नियुक्त किए गए थे। इन दोनों भर्तियों में बड़े पैमाने पर खेल हुआ है। टीईटी के फर्जी अंकपत्र के आधार पर कई युवक और युवतियों ने नौकरी हासिल कर ली है। इन शिक्षकों को वेतन भी दिया जाने लगा है। फर्जी अंकपत्र के आधार पर नियुक्ति की शिकायत पर डीएम लोकेश ने प्रभारी बीएसए भारती शाक्य और राजस्व अधिकारी की टीम बनाकर इसकी जांच के आदेश दिए हैं। बताया जाता है कि जनपद में फर्जी मार्कसीट से 12 लोगों ने नौकरी प्राप्त की है। इन शिक्षकों का वेतन जिलाधिकारी ने जांच पूरी होने तक रोक दिया है। सूत्रों की माने तो जांच में कई अधिकारी और लिपिक भी फंस सकते हैं। क्योंकि इनकी मिलीभगत से ही फर्जी अंकपत्र पर नियुक्ति और वेतन भुगतान हो रहा है। प्रभारी बीएसए भारती शाक्य का बताया कि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया की जांच चल रही है।