रविवार को शहर और कस्बा में मजदूर दिवस पर गिने चुने कार्यक्रम हुए। इनमें लोगों को बताया गया कि यह दिवस क्यों मनाया जाता है। साथ ही मजदूरों की हालत पर चिंता जताई।
मैनपुरी में कम्यूनिस्ट पार्टी के कार्यालय पर बैठक हुई। अध्यक्षता रामसेवक ने की। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि मजदूर दिवस तो सरकार मनाती है लेकिन मजदूरों के उत्थान के लिए धरातल पर कोई काम नहीं होता। यह दिन 1927 से मनाया जाता है। अधिकांश मजदूरों को यह पता नहीं है कि आखिर यह दिन क्यों मनाया जाता है।
वहीं कुरावली में मजदूर दिवस पर गल्ला मंडी में मजदूरों ने एक सभा का आयोजन किया। इसमें दर्जनों की संख्या में मजदूरों ने भाग लेकर संगठन को मजबूत करने पर बल दिया। सभा को संबोधित करते हुए मार्क्सवादी कामरेड महबूब अली ने कहा कि मई दिवस सारे विश्व में मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाता है। एक समय था जब मजदूर 20 से 21 घंटे तक काम करते थे। इसका विरोध करने के लिए मजदूरों ने 1 मई 1886 को अमेरिका में आंदोलन किया था। इसमें अमेरिकी सरकार ने आंदोलन को लाठी और गोलियों से कुचलने का प्रयास किया था। इसके बाद मजदूरों के काम करने के घंटे निर्धारित किए गए थे। तभी से एक मई को मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस मौके पर मजदूर यूनियन अध्यक्ष महेश सिन्हा, संरक्षक संदेश पांडे, सुधीर मिश्रा, सोनू यादव, प्रखर दुबे, गुलफाम हुसैन, प्रवेश कुमार, कामता प्रसाद, माखनलाल, विशेष कुमार, सुभाष जयशंकर आदि लोग मौजूद रहे।
मजदूरों को नहीं पता कुछ
रविवार को मजदूर दिवस के बारे में किसी मजदूर को कुछ पता नहीं था। एक मैरिज होम में काम कर रहे युवक सीटू का कहना था कि साहब हमें तो रोज कमाना और रोज खाना है। इन दिनों से हमारा कोई भला नहीं होने वाला इसलिए इनकी जानकारी रखने से क्या फायदा। निर्माणाधीन महिला अस्पताल में कार्यरत पप्पू का कहना था कि यह दिन सिर्फ दिखावे के हैं। कोई पार्टी और सरकार मजदूरों के बारे में कुछ नहीं सोचती। यदि कुछ करना ही है तो हमारे भले की सही मायने में सोचें। बस स्टैंड पर ईंटें ढोने वाले पंचम का कहना है कि मजदूर दिवस के नाम पर मजदूरों से धोखा होता है। इस दिन होने वाली बैठकों में बड़ी बड़ी बातें होती हैं लेकिन वास्तविकता में कुछ नहीं होता है।