क्राइम कंट्रोल में विफल पुलिसवालों पर एक्शन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
रविवार को एसपी ने स्वाट के सात सदस्यों और सर्विलांस टीम के इंचार्ज को निलंबित कर दिया। उक्त सभी लोगों पर एक सप्ताह पूर्व दन्नाहार क्षेत्र से कुछ युवकों को जबरन उठाने और उनसे अवैध वसूली करने का आरोप है। इसकी शिकायत पीड़ित युवकों ने एसपी से की थी। एसपी ने मामले की जांच सीओ सिटी को सौंपी थी। सीओ सिटी की रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार स्वाट और सर्विलांस प्रभारी एक सप्ताह पूर्व दन्नाहार क्षेत्र से कुछ युवकों को उठाकर लाए थे। इसकी कहीं भी लिखा पढ़त नहीं थी। न ही अधिकारियों को ही इस कार्रवाई की जानकारी दी गई थी। इसके बाद स्वाट के कार्यालय पर उक्त युवकों से लगभग 2.50 रुपये वसूलने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया। स्वाट से छूटने के बाद उक्त युवकों में से एक पवन ने मामले की शिकायत एसपी सुनील कुमार सक्सेना से की थी। एसपी ने मामले की जांच सीओ सिटी राजेश चौधरी को सौंपी थी।
शनिवार को सीओ सिटी ने जांच रिपोर्ट एसपी को सौंपी। रिपोर्ट में स्वाट के सात सदस्यों और सर्विलांस टीम के प्रभारी को दोषी पाया गया। जबकि स्वाट के ही चार सदस्यों सत्यपाल, अजीत, जुगेंद्र चौधरी व अफसर खां को जांच में क्लीन चिट दी गई। एसपी ने रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने पर सर्विलांस प्रभारी मानवेंद्र सिंह, स्वाट के आरक्षी प्रदीप सोलंकी, कौशल प्रसाद, राधेश्याम, संजेश कुमार, धर्मेंद्र सिंह, राघवेंद्र, आरक्षी चालक नरेंद्र कुमार को निलंबित कर दिया। वहीं सर्विलांस और स्वाट टीम प्रभारी के पद पर नई तैनाती की है। अब सर्विलांस इंचार्ज इंस्पेक्टर धीरेंद्र शर्मा और स्वाट प्रभारी दिवाकर सिंह को बनाया गया है।
पहली भी हुई है कार्रवाई
स्वाट टीम की कार्यशैली को लेकर शुरू से सवाल उठते रहे हैं। पूर्व में कार्रवाई हो चुकी है। वर्ष 2016 में गांव सिकंदरपुर में एक घटना के दौरान पहुंची टीम का सदर विधायक राजकुमार यादव से विवाद हो गया था। ग्रामीणों द्वारा स्वाट की मनमानी कार्रवाई को लेकर विरोध दर्ज कराने के बाद तत्कालीन एसपी से शिकायत की थी। उक्त शिकायत पर जांच के बाद प्रथम दृष्टयता इंचार्ज समेत सभी आरक्षियों को दोषी पाते हुए तत्कालीन एसपी ने टीम को भंग कर दिया था। हालांकि कुछ समय बाद टीम का दोबारा गठन कर नई नियुक्तियां की गईं थीं।