मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व सपा के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव
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सपा के घमासान से पार्टी में उथल पुथल मची हुई है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिए जा रहे फैसलों से कार्यकर्ता अचंभित हैं। कौन किसके साथ है इस पर स्थानीय नेता कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। कई गुटों में बंटे कार्यकर्ता भी मौन साधेे हुए हैं।
लखनऊ में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव की मौजूदगी में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव को मार्गदर्शक बनाने की घोषणा की गई। जिसके बाद मुख्यमंत्री समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। मुख्यमंत्री तथा रामगोपाल समर्थक जहां इसे पार्टी हित का निर्णय बताते रहे वहीं दोपहर बाद मुलायम सिंह यादव ने एक बार फिर रामगोपाल को छह साल के लिए पार्टी से निकाल दिया। जिसके बाद कार्यकर्ता एक बार फिर असमंजस में आ गए हैं। उनका कहना है कि पार्टी को पार्टी के लोग ही बरबाद करने पर तुले हुए हैं। जिस पार्टी को सपा मुखिया ने खून पसीने से सींचकर खड़ा किया है उसकी बर्बादी आम कार्यकर्ता नहीं देख सकता है। पार्टी में चल रहे घमासान पर कोई भी नेता और कार्यकर्ता कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।
वही, सपा में रोज बदलते सियासी घटनाक्रम से दोनों ओर से घोषित प्रत्याशियों की धड़कनें तेज हो गई हैं। वह न तो प्रचार और न ही जन संपर्क कर पा रहे हैं। समर्थकों के साथ ही प्रत्याशियों की निगाहें भी नेतृत्व के रोजाना बदल रहे फैसलाें पर टिकी हैं। मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव ने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। फाइनल प्रत्याशी कौन होगा इस पर संशय बना हुआ है। वहीं जब तक सपा में नेतृत्व को लेकर चल रहा विवाद समाप्त नहीं होता तब तक विधानसभा सीट से दावेदारी के संबंध में स्थानीय नेता कुछ भी कहने की स्थिति में खुद को नहीं मान पा रहे हैं।