स्कूलों में बच्चों के हाथ धोने के लिए साबुन-तोलिया होना चाहिए, जिससे लंच के वक्त सफाई से हाथ सके। मगर स्कूलों में स्थिति कुछ अलग ही है। वर्ल्ड हैंड वाशिंग डे पर स्कूलों का मुआयना किया तो साबुन-तोलिया गायब मिले। साथ ही कई स्कूलों के हैंडपंप भी खराब पड़े हैं।
बच्चों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए शासन की ओर से स्कूलों में साबुन, तौलिए आदि रखने के लिए निर्देश दिए गए हैं। प्रत्येक प्रधानाध्यापक को विद्यालय विकास अनुदान के तहत मिलने वाली राशि से खर्च करने के लिए कहा गया है। इसके तहत परिषदीय विद्यालयों को पांच हजार और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों को सात हजार रुपये प्रतिवर्ष दिए जाते हैं। यह राशि सर्व शिक्षा अभियान के तहत दी जाती है। इसके बाद भी प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में न तो साबुन हैं और न ही तौलिए। कई स्कूलों में साबुन-तौलिया हैं भी तो वह शिक्षकों की अलमारी में रखे रहते हैं बच्चों को नहीं मिलते। इस संबंध में पूर्व प्रधानाध्यापक रणवीर सिंह का कहना है कि जो बजट विद्यालय विकास अनुदान के लिए मिलता है वह स्कूल के भवन के रख रखाव के लिए ही काफी कम पड़ता है। ऐसे में उससे तौलिए और साबुन लाना काफी मुश्किल होता है।
2154 स्कूल हैं जिले में
वर्तमान में जिले में प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों की कुल संख्या लगभग 2100 है। इनमें ही विद्यालय विकास अनुदान का पैसा आता है। इनमें करोड़ों रुपये स्कूल के खातों में पहुंचते हैं।
सभी प्रधानाध्यापकों को हैंड वाशिंग-डे मनाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। वह स्वयं स्कूलों में चलने वाले हैंड वाशिंग-डे पखवाड़े का निरीक्षण करेंगे। खामियां मिलने ने कार्रवाई की जाएगी।
आरके यादव, बीएसए मैनपुरी