रक्षाबंधन के त्योहार पर कई कैदियों की बहनें कारागार पहुंचीं और भाइयों की कलाई में राखी बांधकर उनसे अपराध कर्म छोड़ने का वचन भी लिया। जिन कैदियों की बहनें राखी बांधने नहीं पहुंचीं वह सूनी आंखों से जिला कारागार के मुख्य द्वार को निहारते रहे।
जिला कारागार में 11 सौ से अधिक कैदी निरुद्ध हैं। इनमें से कुछ पर गंभीर अपराधों के आरोप हैं तो कुछ को मादक पदार्थ रखने, चोरी, जेबकतरी के आरोप में जेल में निरुद्ध किया गया है। रक्षाबंधन पर सुबह से ही जिला कारागार के मुख्य द्वार पर बहनों की भीड़ जमा हो गई। अधिकांश बहनें हाथों में राखी तथा मिठाई के डिब्बे लेकर आई थीं। करीब 650 कैदियों की बहनें अपने भाइयों की कलाइयों पर राखी बांधने जिला कारागार पहुंचीं। इन बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और मिठाई खिलाने के बाद उनसे अपराध कर्म छोड़ने की बात कही।
जेल में निरुद्ध भाइयों को राखी बांधने आईं बहनों को मिलाई के लिए काफी इंतजार भी करना पड़ा। जेल के पुलिस कर्मियों ने बहनों द्वारा लाई गई मिठाई आदि की गहन तलाशी ली और पहले मिठाई उन्हें खाने को कहा, बाद में जेल में निरुद्ध भाइयों को मिठाई देने की अनुमति दी। जिन कैदियों की बहनें राखी बांधने नहीं पहुंची वह खासे निराश रहे। वहीं दोपहर दो बजे तो जिला जेल के बाहर भीड़ इतनी अधिक हो गई कि जेल प्रशासन की सारी व्यवस्थाएं ध्वस्त होती नजर आईं। हालांकि स्थानीय फोर्स बुलाकर हालात को नियंत्रित किया गया।