ज्योंति। गमा देवी मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में बुधवार को कथावाचक मनोज अवस्थी ने प्रवचन दिए। उन्होंने रुक्मणी विवाह का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि रुक्मणी की भांति जीव जब निष्काम होकर निवकार परमात्मा को पुकारता है तो प्रभु उसका उद्धार करने में देरी नहीं करते।
कथावाचक ने कहा कि शुकदेव जी ने भागवत कथा को विश्राम देने से पूर्व राजा परीक्षित को श्रीकृष्ण विवाह का प्रसंग सुनाया। शुकदेव ने परीक्षित को अल्पआयु से पूर्व कृष्ण-रुक्मणी विवाह कथा इसलिए सुनाई कि यह किसी साधारण कन्या का विवाह नहीं बल्कि जीव का परमात्मा से विवाह है।
उन्होंने कहा कि रुक्मणी ने भगवान श्रीकृष्ण को पत्र लिखकर बताया कि जैसे आप निवकार हैं वैसे ही मैं भी निष्काम हूं। मेरा जीवन आपको समर्पित है। मेरा उद्धार करो। रुक्मणी विवाह प्रसंग के दौरान श्रोताओं ने रुक्मणी के कन्यादान का पुण्य लाभ उठाया।
इस मौके पर उमेश भारती, जयप्रकाश गुप्ता, चंद्रप्रकाश गुप्ता, चंद्रशेखर, चेयरमैन प्रतिनिधि संतोष बाबू, कुलदीप सिंह चौहान, राज बहादुर सिंह चौहान, अंशुल, गौरव, ऋषभ सिंह, कृष्णा, शैलेंद्र सिंह, सोनू चौहान आदि मौजूद थे।