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संयोगिता की भक्ति से प्रकट हुए थे वनखंडेश्वर महादेव

Sun, 14 Aug 2016 11:29 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
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श्रावण माह - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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बाबा भोलेशंकर को समर्पित श्रावण माह के दौरान वैसे तो नगर के सभी शिवालयों पर श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन ऐतिहासिक वनखंडेश्वर महादेव मंदिर की विशेष मान्यता है। श्रद्धालुुओं का मानना है कि यहां बाबा भोलेनाथ के दरबार में सच्चे मन से मानी गई मनोकामना जरूर पूरी होती है। 
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वनखंडेश्वर महादेव का मंदिर सदियों पुराना है। इसकी करहल क्षेत्र ही नहीं बल्कि आसपास के इलाके में भी खासी प्रतिष्ठा है। किवदंती है कि सम्राट पृथ्वीराज चौहान जब संयोगिता का हरण करके ले जा रहे थे तो रात होने पर उनके काफिले ने वनख्ंाडेश्वर क्षेत्र में पड़ाव डाला। उनकी प्रेयसी संयोगिता भगवान शिव की परमभक्त थीं। सुबह होने पर उन्होंने पृथ्वीराज से शिवजी की पूजा-अर्चना करने की इच्छा प्रकट की। आसपास कहीं कोई मंदिर था नहीं जहां उन्हें ले जाकर पूर्ण संरक्षण में पूजा कराई जा सके। इस स्थिति के संयोगिता ने भी अहसास किया। फलस्वरूप उन्होंने दिल से भगवान शिव को याद किया कि हे, भोले बाबा, मेरी भक्ति अगर सच्ची है तो यहीं पर पूजा का प्रबंध करा दें। संयोगिता की पुकार पर एक शिवलिंग जमीन से प्रकट हो गया। 
भगवान शिव की कृपा को देखकर संयोगिता भाव विभोर हो गईं। राजा पृथ्वीराज समेत जिसने भी शिवलिंग के प्रकट होने के बारे में सुना चमत्कृत रह गया। विधि विधान से उसकी पूजा-अर्चना की। राजा ने भगवान शिव की विशेष कृपा मानते हुए उसी स्थल पर मंदिर का निर्माण करा दिया। खासतौर से सावन के दौरान मंदिर पर शिवभक्तों की भीड़ उमड़ती है। सोमवार को तो मेला लगता है। 
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