उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में जिला कारागार में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक बंदी की रविवार को अचानक तबियत बिगड़ गई। सीने में दर्द की शिकायत के बाद जिला अस्पताल लाया गया। वहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। जेल अधिकारियों ने बंदी के परिजन को सूचना दी। मृतक बंदी थाना करहल क्षेत्र के गांव नगला मनू के रहना वाला था।
नगला मनू निवासी आशाराम (76) के खिलाफ वर्ष 1995 में चचेरे भाई की हत्या का आरोप लगा था। मामला न्यायालय में चला। वर्ष 2009 में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। तभी से आशाराम जिला कारागार में निरुद्ध चल रहे थे। वह कुछ दिनों से बीमार थे, उनका उपचार जेल के अस्पताल में चल रहा था।
रविवार की दोपहर अचानक उनकी तबियत बिगड़ने लगी। बताया कि उनके सीने में दर्द हो रहा है। इसके बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया। जिला अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सक ने परीक्षण करने के बाद मृत घोषित कर दिया। बंदी के साथ आए पुलिसकर्मियों ने जेल
अधिकारियों व मृतक के परिजन को जानकारी दी। सूचना मिलने के कुछ देर बाद मृतक का पुत्र व अन्य परिजन मोर्चरी आ गए। इसके बाद पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। वृद्ध की मौत के बाद परिजन का रो-रोकर बुरा हाल है।
प्राइवेट उपचार कराना चाह रहे थे
मृतक आशाराम के पुत्र ने बताया कि पिता कुछ समय से बीमार चल रहे थे। उनकी ओर से प्राइवेट उपचार कराए जाने को लेकर प्रार्थना पत्र भी दिया था। लेकिन उस पर कोई सुनवाई नहीं हुई। मौत को संदिग्ध बताते गहनता से जांच व कार्रवाई की मांग की है।
आशराम आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे। रविवार को सीने में दर्द की शिकायत पर जिला अस्पताल भेजा गया था। वहां उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिजन के आने के बाद पोस्टमार्टम कराया गया है।
- पवन कुमार त्रिवेदी, जेलर
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