कचहरी रोड स्थित कबीर आश्रम में प्रवचन हुए। इसमें महंत अमर साहेब ने कहा कि जहां भौतिक विकास दिखाई दे रहा है। वहीं समाज और परिवार में फूटन भी पड़ रही है। साथ ही पति-पत्नी के तलाक संबंधी 50 प्रतिशत मुकदमे चल रहे हैं।
महंत अमर साहेब ने कहा कि हमारे जीवन का वास्तविक लक्ष्य स्वार्थपूर्ति में अगर चला जाए तो मन की भी पूर्ति नहीं हो पाती और अमूल्य जीवन हाथ से निकल जाता है। उन्होंने कहा कि भजन, भक्ति साधना के लिए लोग सोचते हैं कि जब परिवार से फ्री हो जाएंगे तब करेंगे। इसके चलते सारा जीवन समाप्ति की ओर आ जाता है। तब जाकर हमारा शरीर थक जाता है और हम भक्ति पूजा नहीं कर पाते हैं।
महंत ने कहा कि विज्ञान के सारे चमत्कार अमूल्य मानव जीवन का फल और परिश्रम है। इससे हम परिवार, समाज और राष्ट्र की सेवा कर सकते हैं। इस शरीर में रहते हुए हम जान सकते हैं कि भजन, भक्ति और साधना क्या है। इस दौरान अनेक भक्त मौजूद थे।