डीपीआरओ आफिस के ग्रामीण सफाई कर्मियों के लोन मामले में अब संघ के पदाधिकारियों तथा कार्यालय के लिपिकों में हड़कंप मचा हुआ है। सफाई कर्मियों ने लोन की फाइलें संघ के पदाधिकारियों तथा लिपिकों के माध्यम से पूर्ण कराई थीं। विभाग तथा बैंक की जांच के दौरान सफाई कर्मियों के हस्ताक्षरों के बारे में अनभिज्ञता जताने से मामला पेचीदा होता जा रहा है।
जिले में तैनात 750 ग्रामीण सफाई कर्मियों में से 23 सफाई कर्मचारियों ने ग्रामीण बैंक आफ आर्यावर्त शाखा करहल रोड से तीन-तीन लाख रुपये का लोन लिया है। अधिकांश सफाई कर्मचारियों ने संघ के पदाधिकारियों तथा डीपीआरओ कार्यालय के लिपिकों के माध्यम से ही लोन की फाइलों को पूर्ण कराया है। सभी फाइलों पर डीपीआरओ नरेश चंद्र के हस्ताक्षर भी हैं। बैंक की जांच के बाद अब मामला गरमा गया है। लोन लेनेे वाले ग्रामीण सफाई कर्मी धर्मेंद्र सिंह, इतवारीलाल, सतेंद्र सिंह, रंजीत कुमार, रुबी, राजेश डेबिड, अमृत, राजेश कुुमार, मुकेश कुमार, पप्पू, ममता, अबधेश, सीमा ने विभाग से मिले नोटिस के जवाब में डीपीआरओ के हस्ताक्षरों के फर्जी होने के संबंध में अनभिज्ञता जाहिर कर दी है। लोन मामले में सफाईकर्मी पदाधिकारियों तथा लिपिकों की संलिप्तता से भी इंकार नहीं किया जा रहा है। डीपीआरओ का कहना है उनके किसी भी फाइल पर हस्ताक्षर नहीं हैं। वह सभी फाइलों पर हस्ताक्षर फर्जी बता रहे हैं। बैंक प्रबंधन ने डीपीआरओ के हस्ताक्षरों की जांच के दौरान मिलान कराने के लिए विभाग को पत्र लिखा है। उनका कहना है कि तीन फाइलों पर डीपीआरओ के साइन और काउंटर साइन प्रथम दृष्टया एक जैसे ही नजर आ रहे हैं।