जिला होम्योपैथिक चिकित्सालय में दवा वितरण पर्ची, शीशियां नहीं होने से मरीजों को बैरंग लौटना पड़ रहा है। दूर दराज से दवा लेने आए दो सैकड़ा से अधिक रोगियों को बिना उपचार के ही लौटना पड़ा। वहीं चिकित्सकों ने दवा और सामान न होने का पर्चा अस्पताल के बाहर चिपका दिया है।
जिला अस्पताल परिसर में बना होम्योपैथिक चिकित्सालय में दवाएं तो हैं लेकिन वितरण पर्ची, शीशी नहीं मिल रही है। जिसकी वजह से मरीजों को बैरंग लौटाया जा रहा है। डाक्टरों के अनुसार कई बार जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी को मांगपत्र भेजा गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके चलते वह लोग परेशान हैं। इतना ही नहीं जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी डा. राकेश कुमार स्वास्थ्यकर्मियों का आठ माह से वेतन भी नहीं दे रहे हैं। साथ ही उनका स्थानांतरण भी मथुरा के लिए हो गया है लेकिन नहीं जा रहे हैं।
अस्पताल में तैनात डाक्टर निधि वर्मा ने तो उनके खिलाफ महिला उत्पीड़न की शिकायत भी की है।परेशान प्रभारी चिकित्साधिकारी रामनिवास, डाक्टर निधि वर्मा, डाक्टर एसपी सिंह, कमलेश यादव, वार्ड ब्याय शिशुपाल सिंह ने शुक्रवार सुबह अस्पताल के बाहर दवा, वितरण की पर्ची न होने का पर्चा चिपका दिया।
इन बीमारियों की दवाओं का अभाव
जिला होम्योपैथिक चिकित्सालय में छह माह से दवा वितरण के पर्चे नहीं हैं। साथ ही बुखार, खसरा, चर्मरोग, हैजा, वायरल फीवर, त्वचा रोग, खांसी जुकाम आदि की दवाए नहीं हैं।
16 में से पांच केंद्र पड़े बंद
जिले में होम्योपैथिक दवा वितरण के लिए 16 गांव में होम्योपैथिक दवा वितरण केंद्र बनाए गए हैं। इनमें से पांच केंद्र तो महीनों से बंद पड़े हैं। इनमें घिरोर, नेगवा खिरिया, चितायन, मंछना, नौनेर आदि शामिल हैं। इतना ही नहीं सीएमओ परिसर में बना होम्योपैथिक कार्यालय भी बंद पड़ा है।
मेरे पास किसी भी डाक्टर ने दवा समाप्त होने की सूचना नहीं भेजी। यदि भेजते तो दवा पहुंचाने का प्रयास करता। सारे आरोप गलत लगा रहे हैं। रहा वेतन का सवाल तो यह कार्यालय उपस्थिति दर्ज कराने नहीं आते तो मैं वेतन कैसे निकाल दूं। वहीं मेरी तबियत खराब चल रही है इसके चलते कार्यालय दो-तीन दिन से बंद है।
- डा. राकेश कुमार, जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी