जिले के परिषदीय स्कूलों में कहीं जर्जर भवन, कहीं कक्षा में कचरे का अंबार तो कहीं फटी टाट-पट्टी पर बच्चे पढ़ते नजर आए। अमर उजाला की टीम ने मंगलवार को कई स्कूलों का जायजा लिया। कुछ स्कूलों में तो भवन खस्ताहाल होने के कारण कोहरे के बावजूद बच्चे खुले में पढ़ते दिखे। एक स्कूल में तो टाट-पट्टी का भी इंतजाम नहीं था। बच्चे घर से लाई खाद की खाली बोरियों और चटाई पर बैठकर पढ़ रहे थे। ये हालात हर साल करोड़ों रुपये का बजट खर्च होने के बाद हैं। पूछने पर शिक्षकोंने लाचारी भरा जवाब दिया कि हम क्या कर सकते हैं। वहीं अभिभावकों का कहना था कि व्यवस्था हो न हो, बच्चों का भविष्य संवरने के लिए स्कूल भेजते हैं। आर्थिक रूप से सक्षम होते तो कभी भी बच्चों को ऐसे हालातों में पढ़ाने के लिए कतई नहीं भेजते।
दृश्य एक
प्राथमिक विद्यालय छपट्टी में बच्चे जमीन पर टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ रहे थे। ठंडे फर्श पर बैठने में बच्चों को खासी दिक्कत हो रही थी। ठंड के कारण बच्चों की उपस्थिति भी काफी कम थी। शिक्षकों का कहना था कि कई बार अधिकारियों को पत्र लिखा लेकिन एक ही जवाब आता है कि प्राथमिक विद्यालयों में फर्नीचर की व्यवस्था के लिए कोई आदेश नहीं है।
दृश्य दो
करहल में स्कूल में भी कमोवेश हालात अच्छे नहीं थे। जमीन पर बिछी टाट-पट्टी पर चंद बच्चे बैठे हुए थे। ठंडी जमीन पर कांपते हुए वे शिक्षक को पाठ सुना रहे थे। पूछा गया कि पढ़ाई कैसी चल रही है, तो कोई भी जवाब नहीं दे सका।
दृश्य तीन
शहर से सटे नगला पजाबा के हालात भी कुछ अलग नहीं थे। यहां भी कोहरे के बीच बच्चे जमीन पर बैठने को मजबूर थे। यहां भी शिक्षकों से पूछने पर जवाब मिला कि विभाग की जैसी व्यवस्थाएं हैं, उनके बीच ही बच्चों को पढ़ाने के लिए मजबूर हैं।
दृश्य चार
बिछवां क्षेत्र के नगला बलू में तो हालात और भी बुरे मिले। स्कूल में जिस भवन में बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ रहे थे। उसके पीछे फसलों पर छिड़कने वाली दवा और तमाम कचरा पड़ा हुआ था। इस संबंध में शिक्षक कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं थे। बच्चों के टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ने पर उनका कहना था कि विभाग ने यही व्यवस्था की है, उसी के अनुसार बच्चों को सुविधाएं दे रहे हैं।
दृश्य पांच
जागीर ब्लाक के अजीतगंज में स्थित प्राइमरी स्कूल में भी बच्चे जमीन पर बिछी टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ रहे थे। घने कोहरे में कांपते हुए बच्चों को खुले में बैठाकर पढ़ाया जा रहा था। स्कूल का भवन और शौचालय तक जर्जर थे। यही कारण है कि कोहरे में भी बच्चे खुले में बैठने के लिए मजबूर थे।
दृश्य छह
बिछवां क्षेत्र के गांव नगला निनकू में तो टाट-पट्टी तक फटी हुईं थीं। पूछने पर शिक्षक ने बताया कि काफी समय से विभाग से फंड नहीं मिला है। इस कारण नई टाट पट्टी नहीं मंगाई जा सकी है।
दृश्य सात
किशनी के प्राथमिक विद्यालय बघौनी में तो बच्चों को बैठने के लिए टाट-पट्टी तक नहीं दी गई थी। बच्चे घर से खाद की बोरियों लेकर आए थे और उन्हीं पर बैठने के लिए मजबूर थे। यही नहीं स्कूल में शिक्षकों की जगह आंगनबाड़ी कार्यकत्री बच्चों को पढ़ा रहीं थीं।
दृश्य आठ
भोगांव में भी हालात बदतर मिले। यहां भी बच्चों को बैठने के लिए टाट-पट्टी तक नहीं थी। इसके चलते बच्चों को ठंड में काफी परेशानी हो रही थी। वहीं बेवर के पूर्व माध्यमिक विद्यालय में भी हालात काफी बुरे मिले।
ठंड में होती है परेशानी
छपट्टी स्थित स्कूल में पढ़ रहे पूजा और रोहित ने बताया कि ठंड में जमीन पर बैठकर पढ़ने में काफी परेशानी होती है। व्यवस्था न होने के कारण मजबूरी में जमीन पर बैठना पड़ता है।
आर्थिक तंगी के चलते पढ़ाते हैं
अभिभाव रामकेशव और विनय कुमार ने बताया कि आर्थिक स्थित अच्छी न होने के कारण प्राथमिक विद्यालय मेें बच्चों को पढ़ाना मजबूरी है। यदि आर्थिक स्थित अच्छी होती तो निजी स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाते।
नहीं मिलता फर्नीचर
शिक्षक विनीत चौहान और अंबुज यादव ने बताया कि कई बार विभाग को इस समस्या के बारे में बताया। साथ ही फर्नीचर की मांग भी की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। अधिकारी शासनादेश का हवाला देते हुए कह देते हैं कि प्राथमिक विद्यालयों में फर्नीचर नहीं दिया जाता है।
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