विश्व तंबाकू निषेध सप्ताह का आयोजन जिले में किया जा रहा है। हालांकि इस अवसर पर कोई ठोस योजना न तो स्वास्थ्य विभाग ने बनाई है, और न किसी सामाजिक संगठन ने ही कोई कदम उठाया। तंबाकू के लिए प्रसिद्ध मैनपुरी में इस नशे के खिलाफ जागरूकता की कोई पहल नहीं होने का ही परिणाम है कि विश्व में मुंह और गले के सर्वाधिक कैंसर रोगी यहीं पाए जाते हैं।
सर्वोच्च न्यायालय ने सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान वर्जित करने का आदेश देकर एक सार्थक पहल की थी। पर, आदेश के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी जिनके ऊपर है, वे लापरवाह बने हैं। यही कारण है कि रोक के बाद भी शिक्षण संस्थाओं के आसपास 200 मीटर की परिधि में तंबाकू, गुटखा, बीड़ी, सिगरेट की बिक्री होती रहती है। हैरत की बात तो यह है कि कानून बनने के बाद से अब तक इसे लेकर न तो किसी का चालान हुआ है और न ही किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है। प्रधानाचार्य डॉ राममोहन कहते हैं कि केवल दिवस मनाने या भाषण देने से ही तंबाकू के प्रयोग को नहीं रोका जा सकता। इसके लिए सार्थक पहल जरूरी है। कहा कि आज मामला इतना बिगड़ गया है कि कि पिता पुत्र से और शिक्षक शिष्य से तंबाकू मंगाने में परहेज नहीं कर रहे हैं। वहीं जागरूकता के अभाव में किशोर और युवा पीढ़ी तम्बाकू, सिगरेट की गिरफ्तर में आती जा रही है।
सीएमओ डॉ केके शर्मा के अनुसार विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक विश्व में सर्वाधिक मुंह और गले के कैंसर रोगी मैनपुरी में हैं। इसके बाद भी जिले में तंबाकू के बढ़ते प्रयोग पर अंकुश लगाने को कोई सार्थक पहल नहीं हो रही है।
इनसेट
तंबाकू के दुष्प्रभाव
: मुंह, गले, लिवर, फेफड़े, किडनी में कैंसर होने का खतरा
: रक्त प्रवाह बाधित होने की संभावना
: रक्तचाप बढ़ने का खतरा
: आंखों के लिए हानिकारक
: मुंह के कम खुलने का खतरा