नगर की साहित्यिक संस्था काव्य साधना समिति के तत्वावधान में राधा रमन रोड स्थित एक पैलेस में काव्य गोष्ठी हुई। इस दौरान कवियों ने अपनी-अपनी रचनाएं सुनाईं।
काव्य गोष्ठी में ब्रजेंद्र सिंह सरल ने वंदना प्रस्तुत करते हुए कहा कि माता वाणी मुझे एक वरदान दे, मान दे, बुद्धि दे और ज्ञान दे। कहा कि मेरे मन की अभिलाषा है मैं ऐसा चंदन बन जाऊं, औरों के कुछ काम आ सकूं, मैं ऐसा कुंदन बन जाऊं। शिव सिंह नि:संकोच ने कहा कि सर्दियों में सिकुड़ते हैं, जो कंबल दान पाने को, मुहैया भी नहीं भोजन उन्हें दो जून खाने को। यश भारती से सम्मानित डा. दीन मोहम्मद दीन ने कहा कि पावन माटी देश की, हम उसकी संतान, माटी का वंदन करुं, जय हो हिंदुस्तान।
कवि राशिद राहत मुरादाबादी ने कहा कि जिसका जैसा जहन है, राशिद वो वैसा महसूस करे, मेरी गजलों से तो हिंदुस्तान की खुशबू आती है। चंद्रमोहन शर्मा ने कहा कि किसी के नाम मिल जाए, वो सम्मान कैसा है, नहीं हो मान जिसका फिर भला अपमान कैसा है। इसके अलावा गिरीश चंद्र यादव निराला, उजागर लाल मौर्य ने भी काव्य पाठ किया। अध्यक्षता डा. दीन मोहम्मद दीन और संचालन राशिद राहत मुरादाबादी ने किया। प्रवींद्र राठौर, डा. एम अनम, इकरार इलाही, कायम सिंह, सुरेशचंद्र यादव आदि मौजूद रहे।