क्षेत्र के गांव बुढौली में अनाथ बच्चों की मदद के लिए गुरुवार को कई लोग आगे आए। गांव बुढौली पहुंचकर लोगों ने अनाथ बच्चों को खाने पीने का सामान और आर्थिक सहायता दी। वहीं चिकित्सकीय टीम ने बीमार बच्ची को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया है।
उल्लेखनीय है कि अमर उजाला के गुरुवार के अंक में पेज नंबर चार पर पिता की मौत के बाद दलित बच्चे दाने-दाने को मोहताज शीर्षक से खबर छपी थी। इसे पढ़ने के बाद गुरुवार को कई लोग बच्चों की मदद के लिए आगे आए हैं। सुबह से ही गांव बुढौली दलित के घर के बाहर लोगों की भीड़ जुटने लगी। हर कोई बच्चों की तकलीफ को अपनी तकलीफ बताकर मदद करता दिखा। ब्लाक प्रमुख पति इंजीनियर रामपाल यादव ने दलित परिवार के बच्चों को 5100 रुपये दिए। सुनील यादव और बिल्लू यादव ने 1100-1100 रुपये दिए। साथ ही घर में शौचालय व अन्य जरूरत का सामान देने का वादा किया। गांव के राशन डीलर भी मदद के लिए आगे आया। उसने बच्चों के खाने पीने के लिए गेहूं और चावल के पैकेट भेजे। ब्लाक प्रमुख ने राशन डीलर को प्रतिमाह राशन देने की बात कही। मदद करने वालों में हृदेश सिंह ने बच्चों के लिए एक क्विंटल आटा, जीएसएम डिग्री कॉलेज के प्रबंधक मनोज दुबे ने खाने पीने के सामान के अलावा जब तक सरकारी मदद न मिले। तब तक खर्च के लिए तीन हजार रुपये प्रति माह देने का वादा किया। साथ ही 3000 रुपये नकद दिए। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष यदुवीर यादव और मंत्री राजीव मिश्रा ने आर्थिक मदद दी। कई शिक्षण संस्थान भी बच्चों की पढ़ाई और खर्च का जिम्मा लेने के लिए आगे आए हैं। पीएचसी प्रभारी डाक्टर संजीव गुप्ता ने बीमार बच्ची का चिकित्सकीय परीक्षण किया।
ग्राम प्रधान ने बच्चों को धमकाया
कुसमरा। ग्राम प्रधान ओमप्रकाश ने बच्चों को धमकाया। उनसे कहा कि तुम लोग दलित परिवार के बच्चे हो तुमने ठाकुरों की मदद क्यों ली। धमकी से सहमे बच्चों ने इसकी शिकायत ब्लाक प्रमुख मीरा देवी से की है।