बीती 19 मार्च को भोगांव थाना क्षेत्र के नगला दीपा के निवासी कारोबारी दिलीप कुमार यादव (24) पर कन्नौज के उमर्दा में शूटरों ने हमला किया था। शूटरों ने उसके साथ मारपीट की। इसके बाद सिर के पिछले हिस्से में गोली मार दी थी। 21 मार्च को इलाज के दौरान दिलीप की मौत हो गई। औरैया पुलिस ने खुलासा किया है कि दिलीप की हत्या उसकी ही पत्नी प्रगति ने ही कराई थी। वारदात उसने अपने प्रेमी फफूंद निवासी अनुराग यादव और अछल्दा निवासी शूटर रामजी नागर के जरिये करा दी। दो लाख रुपये में हत्या तय की गई। प्रगति ने मुंह दिखाई में मिले एक लाख रुपये बतौर एडवांस हत्या के लिए दिए।
तीन साल से होती थी दोनों में बात
मृतक दिलीप के भाई अक्षय यादव ने बताया कि वह चार भाई और एक बहन हैं। सबसे बड़े भाई संदीप यादव हैं, उनकी शादी पारुल के साथ 2019 में हुई थी। भाभी पारुल की छोटी बहन प्रगति और दिलीप के बीच तीन साल पहले वार्ता शुरू हुई थी। पिछले एक साल से दिलीप परिजन से जिद कर रहा था कि उसकी शादी प्रगति के साथ ही कराई जाए। परिजन भी दिलीप की जिद के आगे झुक गए। दिलीप ने खुद ही परिवार के साथ जाकर प्रगति के लिए शादी पर देने के लिए साड़ी से लेकर आठ लाख रुपये के गहनों तक की खरीदारी की थी।
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छोटी बहन की करतूत पर बड़ी बहन गुमसुम
प्रगति की इस करतूत ने दिलीप की जिंदगी छीन ली। सुमेर सिंह यादव के हंसते-खेलते परिवार में मातम पसरा दिया। सुमेर सिंह यादव के चार बेटे हैं, जिनमें संदीप सबसे बड़ा, उसके बाद अक्षय, तीसरे नंबर का दिलीप और चौथे नंबर का सचिन व छोटी बेटी प्रियंका है। संदीप की शादी 2019 में पारुल के साथ की थी। संदीप और पारुल दिबियापुर, औरैया में रहते हैं। दिलीप भी कामकाज के सिलसिले में उनके ही साथ रहता था।
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दरअसल, परिवार के पास 12 हाइड्रा और 10 क्रेन हैं। दिलीप औरैया में रहकर औरैया और कन्नौज में काम देखता था। इधर, भोगांव के नगला दीप में अक्षय की पत्नी सोनी, दो बच्चे, पिता सुमेर सिंह, मां सुमन देवी रहते हैं। हत्या का पुलिस ने बीते सोमवार को खुलासा किया तो पारुल अपनी छोटी बहन प्रगति की करतूत पर हैरान रह गई। वह गुमसुम हो गई। उसकी आंखों में दुख का सैलाब इस कदर उमड़ रहा था, मानो वह कह रही हो कि छोटी ने करतूत की है, उसकी सजा उसे कानून देगा। मेरे दामन में उसका कलंक न लगाए जाए।
गोली लगने की सूचना पर आई थी सैफई, ग्वालियर तक रही साथ
मृतक के भाई अक्षय यादव ने बताया कि भाई पर हमला होने की सूचना के बाद परिजन और पुलिस उसे सैफई मेडिकल कॉलेज लेकर आए थे। यहां कुछ देर बाद ही प्रगति भी आ गई थी। सैफई मेडिकल कॉलेज से जब भाई को ग्वालियर ले गए तो वह वहां भी साथ गई थी। इसके बाद परिजन ने उसे वापस भेज दिया था। नहीं पता था कि वह इस कदर शातिर है कि साथ रहने का नाटक करके अपनी करतूत को छिपाने का खेल खेल रही है।
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हत्यारोपियों को हो फांसी
मृतक दिलीप के पिता सुमेर सिंह, मां सुमन देवी ने कहा कि जिस प्रकार उनके बेटे की गोली मारकर हत्या कराई गई है, उसी प्रकार हत्यारोपियों को भी पुलिस एनकाउंटर में गोली मार दे। पिता सुमेर सिंह ने कहा कि वह अदालत में मुकदमा आखिरी दम तक लड़ेंगे। आरोपियों को फांसी की सजा दिलाकर ही अपने बेटे की हत्या का बदला लेंगे।