मैनपुरी। पुराणों में सीता, सावित्री और अनुसइया जैसी मातृ शक्ति का वर्णन मिलता है। कलियुग में भी ऐसी देवियों की कमी नहीं है। कुछ महिलाएं आज के दौर में भी ऐसी ही मिसालें समाज को प्रेरित करती हैं। बेवर निवासी मोना दुबे ने सावित्री बन अपने प्रेम से यह साबित कर दिया है कि सच्चा जीवनसाथी वही होता है, जो हर परिस्थिति में पति का साथ निभाए।बेवर निवासी मोना दुबे के पति संदीप दुबे एक वर्ष पूर्व गंभीर बीमारी की चपेट में आ गए। उनका स्वास्थ्य लगातार गिरता जा रहा था। परिजन ने कई जगह उपचार दिलाया लेकिन कोई आराम नहीं मिला। जांच में पता चला कि उनका लिवर पूरी तरह से खराब हो चुका था। डाक्टरों ने सलाह दी कि संदीप का जीवन बचाने का एकमात्र रास्ता लिवर ट्रांसप्लांट है। डाॅक्टर की बात सुनकर परिवार के लोग चिंतित हो गए मानो उनके ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा हो। डाॅक्टर की राय पर मोना ने हिम्मत दिखाई। उन्होंने डाॅक्टर से कहा कि वह अपने पति की जान बचाने के लिए कुछ भी दान करने को तैयार है। डॉक्टरों ने चिकित्सकीय प्रक्रिया के बाद मोना के लिवर का एक हिस्सा संदीप को ट्रांसप्लांट किया इससे संदीप की जान बच गई। आज दोनों प्रेम से एक दूसरे के साथ रह रहे हैं।
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परिजन को सता रहा था डर, लेकिन मोना ने नहीं हारी हिम्मत
पति की गंभीर बीमारी ने परिवार को झकझोर कर रख दिया, लेकिन मोना की हिम्मत और प्यार ने हालात बदल दिए। जब डाक्टर की सलाह पर मोना लिवर ट्रांसप्लांट के लिए राजी हुई तो परिवार के लोग चिंतित थे कि कहीं बेटे साथ बहू का स्वास्थ्य भी खराब न हो जाए। लेकिन सावित्री बनी मोना हर पल साहस के साथ खड़ी थी। उसके साहस को देखकर परिवार के लोग भी लिवर ट्रांसप्लांट के लिए राजी जो गए। दिल्ली के आईएलबीएस (इंस्टिट्यूट आफ लिवर एंड बिलिअरी साइसेंस) में सफल आपरेशन के बाद उनके पति को नया जीवन मिला। आज वे धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहे हैं।
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पति-पत्नी का रिश्ता जीवन साथी के रूप में जाना जाता है। परेशानियों में पति के लिए खड़े रहना पत्नी का धर्म है। यदि मेरे शरीर का कोई हिस्सा उनकी जिंदगी बचा सकता था तो इससे बड़ा सौभाग्य मेरे लिए क्या हो सकता है।
मोना दुबे