मैनपुरी। शहर सहित ग्रामीण इलाकों में लंबे इंतजार के बाद हुई मानसून की बारिश ने धान की फसल के लिए संजीवनी का काम किया है। पिछले कई दिनों से तेज धूप और उमस भरी गर्मी के चलते खेतों की नमी खत्म हो रही थी। जमीन सूखने लगी थीं। ऐसे में इस बारिश ने सूखती फसलों को नया जीवनदान दिया है।
बारिश होने से किसानों को महंगे डीजल और नलकूप से सिंचाई करने के आर्थिक बोझ से राहत मिली है। किसानों का कहना है कि मानसून की बारिश धान के पौधों में तेजी से वृद्धि के लिए अत्यंत गुणकारी साबित होगी। अगैती व पिछैती दोनों ही फसलों को फायदा होगा। बारिश से बेवर क्षेत्र के नवीगंज, मदनपुर, गग्गरपुर, बझेरा, सोवनपुर, रायपुर, बमिया, नगला दलीप, मझोला, जलालपुर, खांकेताल में खेतों में पानी भर जाने से फसलें फिर से लहलहा उठी हैं। किसान राज़ सिंह, महाराज सिंह, सुभाष चंद्र, दिलीप का कहना है कि अगर समय पर बारिश न होती तो धान की पैदावार पर गंभीर असर पड़ता। इस प्राकृतिक सिंचाई से अब धान की अच्छी पैदावार की उम्मीद फिर से जाग उठी है।
बारिश के बाद हुआ जलभराव
मानसून की बारिश के बाद जगह-जगह हुए जलभराव ने जल निकासी की व्यवस्था की पोल खोल दी है। नालों और नालियों की समय पर तलीझाड़ सफाई न होने से बारिश का गंदा पानी सड़कों पर जमा हुआ है। लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जीटी रोड पर टीचर कॉलोनी व डाक बंगले के सामने हुए जलभराव से राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बस स्टैंड चौराहा, फर्रुखाबाद रोड और इटावा रोड पर पानी भरने से परेशानी हुई। जलभराव से दुकानदारों काे भी परेशानी हुई। अनुपम मास्टर, संजीव, संजू शुक्ला, सचिन, कल्लू ने जलनिकासी कराने की मांग की है। संवाद
फोटो 6 बेवर के गग्गरपुर क्षेत्र में लहलहाती धान की खड़ी फसल। संवाद