मैनपुरी। मायके में रह रही एक महिला ने अपने पति की मृत्यु के बाद परिवार रजिस्टर में खुद को मृतक आश्रित के रूप में फर्जी तरीके से दर्ज करा लिया। मृतक की मां की शिकायत पर हुई दो जांचों में यह आरोप सही पाए गए हैं, जिसमें पंचायत सचिव को दोषी ठहराया गया है। हालांकि, अभी तक महिला का नाम परिवार रजिस्टर से नहीं हटाया गया है, जिस पर मृतक की मां ने नाम काटने की मांग की है।
यह मामला विकासखंड मैनपुरी की ग्राम पंचायत रतिभानपुर के नगला मनू का है। यहां की विनीता ने जिलाधिकारी से शिकायत की थी। उन्होंने बताया कि उनके पुत्र मनीष ग्रामीण सफाई कर्मचारी के पद पर बेवर विकासखंड के नवीगंज में कार्यरत थे। मनीष का विवाह प्रगति उर्फ रूबी के साथ 21 फरवरी 2023 को हुआ था। शादी के तुरंत बाद प्रगति अपने मायके चली गई थी। मनीष ने प्रगति को वापस बुलाने के लिए न्यायालय में एक मुकदमा दायर किया था, जो अभी भी विचाराधीन है। इसी दौरान, मनीष की तीन अक्टूबर 2025 को एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। विनीता ने आरोप लगाया कि पंचायत सचिव प्रबल प्रताप सिंह ने गलत अभिलेखों के आधार पर प्रगति का नाम मृतक आश्रित के रूप में परिवार रजिस्टर में अंकित कर दिया। यह कार्रवाई तब की गई जब प्रगति का मनीष से कोई संबंध नहीं था और उनका वैवाहिक विवाद न्यायालय में लंबित था।
जांच में पंचायत सचिव दोषी
जिलाधिकारी के आदेश पर इस मामले की जांच की गई। विकासखंड बेवर के सहायक विकास अधिकारी पंचायत जय कुमार सक्सेना और विकासखंड मैनपुरी के सहायक विकास अधिकारी पंचायत अरविंद सिंह ने यह जांच की। दोनों जांचों में पंचायत सचिव प्रबल प्रताप सिंह को फर्जी नाम अंकित करने का दोषी पाया गया। इसके बावजूद, पंचायत सचिव ने अभी तक महिला का नाम परिवार रजिस्टर से नहीं हटाया है।
मां ने की नाम हटाने की मांग
मृतक मनीष की मां विनीता ने जिलाधिकारी से पुनः गुहार लगाई है। उन्होंने अपनी बहू प्रगति का नाम परिवार रजिस्टर से काटकर सत्य प्रति उपलब्ध कराने की मांग की है। विनीता का कहना है कि जब प्रगति मायके में रह रही थी और पति से उसका मुकदमा चल रहा था, तो उसे मृतक आश्रित का लाभ नहीं मिलना चाहिए। इस मामले में आगे की कार्रवाई का इंतजार है।
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डीपीआरओ ने कराई थी जांच
मृतक की मां विनीता की शिकायत पर डीपीआरओ डॉ़ अवधेश सिंह ने दो बार मेंं जांच कराई। दोनों बार पंचायत सचिव को परिवार रजिस्टर में फर्जी नाम अंकित करने का दोषी पाकर जांच रिपोर्ट दी गई। मृतक की मां का आरोप है कि इसके बाद भी पंचायत सचिव फर्जी नाम को परिवार रजिस्टर से नहीं हटा रहे हैं। पीड़िता ने परिवार रजिस्टर से फर्जी नाम काटकर परिवार रजिस्टर की सत्य प्रति दिलाने की मांग की है।
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क्या कहते हैं नियम
पंचायत राज नियमावली 1970 की 6 के तहत कोई भी व्यक्ति परिवार रजिस्टर में नाम न होने पर अपना नाम शामिल कराने के लिए सहायक विकास अधिकारी पंचायत को आवेदन कर सकता है। इसी धारा के तहत सहायक विकास अधिकारी पंचायत की जांच के बाद की पंचायत सचिव उस व्यक्ति का नाम परिवार रजिस्टर में शामिल करेगा।
मनीष की पत्नी द्वारा दिए गए अभिलेखों के आधार पर उसका नाम परिवार रजिस्टर में अंकित किया गया है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। मामले में जांच चल रही है। जांच के बाद ही कुछ और कहा जा सकता है।
प्रबल प्रताप सिंह, पंचायत सचिव, रतिभानपुर
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परिवार रजिस्टर में फर्जी तरीके से नाम अंकित करने की शिकायत पर जांच कराई गई थी। जिसमें दोष सही पाए गए। गलत नाम को परिवार रजिस्टर से हटाने के निर्देश दिए गए थे। आगे क्या कार्रवाई हुई है, इसके बारे में सोमवार को कार्यालय खुलने पर बताया जा सकेगा। अवधेश सिंह, डीपीआरओ