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चिकित्साकर्मियों ने जिला अस्पताल में डाला ताला

Thu, 04 Aug 2016 11:24 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
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हड़ताल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सीएमएस के उत्पीड़न से परेशान चिकित्साकर्मियों ने गुरुवार को सुबह नौ बजे से जिला अस्पताल में नारेबाजी करते हुए ताला डाल दिया। इसके चलते तीन घंटे स्वास्थ्य सेवाएं बाधित रहीं। इससे रोगी भटकते रहे। वहीं डीएम के निर्देश पर पहुंचे सीएमओ और एसडीएम के आश्वासन के बाद जिला अस्पताल का ताला खोला। तब कहीं जाकर रोगियों को दवा मिलनी शुरू हो सकी। 
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चिकित्साकर्मियों का आरोप है कि सीएमएस मान्यता प्राप्त संगठनों के पदाधिकारियों के समय मांगने पर भी उनसे वार्ता नहीं करते हैं। चीफ फार्मासिस्ट अनुपम कुमार दुबे के नियमानुसार आख्या देने के बाद भी कार्यभार ग्रहण न कराकर 50 हजार रुपये मांगकर उनका मानसिक उत्पीड़न कर रहे हैं। चरित्र पंजिका लिखने एवं एसीपी लगाने के पांच से दस हजार रुपये की मांग करते हैं। सीएमएस कई पटलों में कार्यरत कर्मचारियों से महीनादारी मांगते हैं। मना करने पर उनकी चरित्र पंजिका खराब करने और स्थानांतरण की धमकी देते हैं। साथ ही अपनी जाति का बार-बार हवाला देकर कर्मचारियों को आतंकित करते हैं। सीएमएस ने उन लोगों को मानव संपदा का प्रारूप फार्म उपलब्ध नहीं कराया और न भरने पर वेतन रोकने की धमकी देते हैं। अस्पताल की पुताई रंगाई का पैसा भी बंदरबांट कर लिया गया।  
चिकित्साकर्मियों ने परेशान होकर सुबह नौ जिला अस्पताल में ताला डाल दिया। साथ ही सीएमएस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए न्याय दिलाने की मांग की। इससे लगभग तीन घंटे स्वास्थ्य सेवाएं बाधित रहीं। वहीं डीएम के निर्देश पर सीएमओ केके शर्मा और एसडीएम सदर मौके पर पहुंचे। सीएमओ के समझाने के बाद डीएम से संबोधित ज्ञापन एसडीएम को दिया।  इस मौके पर शिवमंगल सिंह, महेंद्र सिंह राठौर, केके दुबे, अवधेश यादव, गजेंद्र सिंह, सुधीर शर्मा, माधुरी यादव, मनोरमा, नीलम राठौर आदि शामिल थे। 
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तीन घंटे तक भटकते रहे रोगी
मैनपुरी। चिकित्साकर्मियों द्वारा अस्पताल के गेट पर ताला डालने से दूरदराज से उपचार के लिए आए रोगी भटकते रहे। तीन घंटे बाद ताला खुलने पर मरीज अस्पताल के अंदर पहुंचे। तब कहीं जाकर डाक्टर को दिखा सके। शहर के समीपवर्ती गांव नगरिया से आए 55 वर्षीय रामकुमार का कहना था कि वह धूप की वजह से सुबह नौ बजे ही दिखाने आ गए थे, लेकिन यहां प्रदर्शन होने के चलते उन्हें तीन घंटे परेशान होना पड़ा। कुछ ऐसा ही कहना था मोहल्ला दरीबा के श्याम सिंह, गांव पड़रिया की सुषमा देवी, महमूदनगर के चांद मोहम्मद आदि का।

चिकित्साकर्मियों द्वारा लगाए गए सभी आरोप गलत हैं। वह उन पर दबाव बनाना चाहते हैं। कारण, वह सभी को काम में लगाए रहते हैं। यह लोग काम नहीं करना चाहते हैं। सभी इमरजेंसी में ड्यूटी करना चाहते हैं। फार्मासिस्ट से 50 हजार रुपये मांगने की बात भी गलत है। उन्होंने केवल उनसे उनका रिलीव लेटर मांगा था।
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-डाक्टर दुष्यंत त्यागी, सीएमएस, मैनपुरी
                                             
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