शहर व कस्बों के जैन मंदिरों में मंगलवार को पर्यूषण पर्व मनाया गया। विद्वानों ने कहा कि यह जैन समाज का ही नहीं वरन जन-जन का पर्व है। इस पर्व में दस दिनों तक उपवास रखकर धर्म के दस लक्षणों की उपासना की जाती है।
नगर के आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में बाल ब्रहम्माचारी साधना दीदी ने पर्यूषण पर्व के पहले दिन उत्तम क्षमा के विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि सामाजिक जीवन में शांति बनाए रखने के लिए क्रोध को छोड़कर क्षमा धारण करनी चाहिए।
सुनीता शास्त्री ने कहा कि क्रोध से भी ज्यादा खतरनाक बैर रखना है। क्रोध के आवेश में तो व्यक्ति तत्काल प्रतिक्रिया व्यक्त करता है लेकिन जब यह क्रोध बैर में बदल जाता है तो व्यक्ति योजनाबद्ध ढंग से विनाश करता है। इससे पूर्व सभी जैन मंदिरों में अभिषेक व पूजन किया गया। इस मौके पर विजय जैन, रमेश चंद्र जैन, ब्रजेश जैन, पदमकांत जैन, डाक्टर सौरभ जैन, पंडित कमल जैन, प्रमोद जैन आदि मौजूद रहे। भोगांव में पर्यूषण पर्व के पहले दिन जैन मंदिरों में श्रद्धालुओं ने विशेष पूजा अर्चना की। प्रात: से ही नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर तथा श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में श्रद्धालु की भीड़ रही। प्रात: मंदिरों में जिनेंद्र अभिषेक व सामूहिक पूजन की गई। दोपहर में इष्टोपदेश तथा सायंकाल जिनेंद्र भक्ति का कार्यक्रम संपन्न हुआ। दिल्ली से आए जैन विद्वान ब्रहमाचारी पंडित धरणेंद्र कुमार जैन ने पर्यूषण पर्व पर प्रवचन दिए। इस दौरान ब्रजगुप्त जैन, डा. योगेश जैन, सुनील जैन, आशीष जैन, राहुल जैन, वीरचंद्र जैन, संजय जैन, प्रवीण जैन, अशेष जैन, राजीव जैन आदि उपस्थित रहे।