जोरानाथ (75) गांव में लगने वाली अदालत के प्रमुख जज हैं। वह कहते हैं कि उनकी अदालत में फैसला एक दिन में नहीं होता। कई दिन लगते हैं। दोनों पक्षों को सुनकर फैसला सुनाया जाता है और उस पर सहमति बनाई जाती है। उनके ज्यादातर फैसले दोनों पक्ष मान लेते हैं। अगर कोई फैसला नहीं मानता तो उसे समाज से बेदखल कर उसका हुक्का-पानी बंद कर दिया जाता है।
जोरानाथ के सहयोगी सुरेंद्रनाथ (70) ने बताया कि उनकी अदालत दोषी को शारीरिक दंड देने के बजाय जुर्माना लगाने पर ज्यादा विश्वास करती है ताकि पीड़ित पक्ष की मदद हो सके। फैसले पर सहमति बनने के बाद दोनों पक्षों को सम्मान का प्याला सौंपा जाता है। अगर किसी ने यह प्याला नहीं लिया तो माना जाता है कि उसे फैसला स्वीकार नहीं है।
हाथ जला तो दोषी
इस अदालत में न्याय पाने के लिए व्यक्ति को अग्नि परीक्षा देनी पड़ती है। अदालत सच्चाई परखने के लिए आरोपी के हाथ पर पीपल के सात पत्ते रखकर उस पर डेढ़ किलो वजनी गर्म लोहे की मोटी छड़ रखती है और उसे सात कदम चलना होता है। हाथ जलने पर आरोपी को दोषी मान लिया जाता है और हाथ नहीं जलने पर निर्दोष।
नगला बील की अदालत के जज
जोरानाथ, सुरेंद्रनाथ, कमलेश नाथ, राजकुमार नाथ, सोनपाल नाथ, पातीरामनाथ, राजेश नाथ, राजवीर नाथ, ब्रह्मानाथ, सत्यपालनाथ और नवाबनाथ।
छिन गया पुश्तैनी हुनर, मजदूरी के भरोसे चल रहे चूल्हे
देशभर के सपेरों को न्याय देने वाला तीन हजार की आबादी का यह गांव आज रोजगार और बच्चों के भविष्य को लेकर बेबस है। सांप पकड़ने और प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगने से बीन की धुन खामोश हो गई है और पुश्तैनी कला छिन गई है। अब मजदूरी ही आजीविका का इकलौता विकल्प है। ग्रामीण राजेश नाथ और सुभाषचंद्र का कहना है कि कानून ने जीविका तो छीन ली लेकिन वैकल्पिक रोजगार नहीं दिया। यदि सरकार आर्थिक सहायता और बच्चों के लिए उच्च शिक्षा की ठोस व्यवस्था करे तो हमारी नई पीढ़ी का भविष्य संवर सकता है।
गांव में सभी लोग मिलजुलकर रहते हैं। छिटपुट मामले गांव की ही अदालत में निपटा लिए जाते हैं। कई वर्षों से इस गांव का कोई भी मामला थाने नहीं पहुंचा है और न ही प्राथमिकी दर्ज हुई है। - सोनू यादव, ग्राम प्रधान
किशनी थाना क्षेत्र के गांव नगला बील में बीते 8 वर्ष से एक भी प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है। गांव में सभी लोग मिलजुलकर रहते हैं। छोटा-मोटा कोई विवाद होता भी है तो उसे गांववाले आपस में ही निपटा लेते हैं। - अरुण कुमार, एसपी सिटी