जिले में निर्धारित लक्ष्य का अभी तक केवल 14 प्रतिशत ही धान खरीदा गया है। जबकि एफसीआई और पीसीएफ की खरीद अभी तक शून्य है। ज्यादातर किसान मंडी में धान बेचने को वरीयता दे रहे हैं।
जिले को इस बार 34000 क्विंटल धान खरीद का लक्ष्य मिला है, जिसमें 20000 क्विंटल खाद्य विभाग, 10000 क्विंटल पीसीएफ, चार हजार क्विंटल धान की खरीद एफसीआई को करनी है। खाद्य विभाग ने ही अभी तक केवल 5300 क्विंटल धान की खरीद की है। जबकि एफसीआई और पीसीएफ की खरीद अभी तक शून्य ही है। जिला खाद्य विपणन अधिकारी नंदकिशोर का कहना है एक अक्तूबर से खरीद शुरू करने का लक्ष्य तय होता है। 31 जनवरी तक खरीद पूरी करनी होती है। अक्तूबर और नवंबर माह में धान बेचने के लिए किसान आते ही नहीं हैं। एक दिसंबर से ही खरीद शुरू हो पाती है। वह भी सरकारी केंद्रों पर केवल मोटा धान ही खरीदा जाता है। जिले में अधिकांश किसान पतले चावल की ही पैदावार करते हैं।
किसान सरजू दयाल मिश्रा का कहना है कि लागत के अनुरूप उपज का मूल्य सही मिलने के कारण ही किसान अब मोटे धान की बजाए पतले धान की पैदावार अधिक करते हैं। इस धान की मंडी में अच्छी कीमत मिल जाती है। सरकारी एजेंसी पर धान बेचने पर निर्धारित मूल्य ही मिलता है। जबकि मंडी में ज्यादा मिलता है।
व्यापारी वोट सिंह यादव का कहना है किसान को धान की क्वालिटी के हिसाब से भुगतान किया जाता है। सरकारी एजेंसी पर जहां 1470 रुपया प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदा जाता है वहीं मंडी में 2200 से 2300 रुपया प्रति क्विंटल तक की दर से खरीद होती है। किसान को नकद भुगतान भी किया जाता है।
सरकारी एजेंसियों पर धान की खरीद बहुत कम हुई है। दो एजेंसियों की खरीद अभी तक शून्य है। सभी एजेंसियों को 31 जनवरी तक खरीद की लक्ष्य पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। खरीद पूरी नहीं होने पर एजेंसियों के खिलाफ लिखा जाएगा।
-चंद्रपाल सिंह, जिलाधिकारी