दूध उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने एवं रोजगार सृजन का सरकार का लक्ष्य जिले में हांफ रहा है। बैंकों की उदासीनता सरकार की योजनाओं को पलीता लगा रहीं हैं। लाख प्रयास के बावजूद डेयरी योजना की रफ्तार सुस्त पड़ी हुई है। डेयरी विकास की संभावनाएं भी हीन नजर आती है। आर्थिक रूप से कमजोर किसान ऋण लेने के लिए कार्यालय एवं बैंकों का चक्कर लगाते-लगाते थक जाते हैं परंतु ऋण नहीं मिलता। प्रदेश सरकार ने कामधेनु और मिनी कामधेनु डेयरी में से आठ स्वीकृत हो सकीं। छह कामधेनु में से तीन ही स्वीकृत हो सकीं। इनमें से भी चार मिनी और दो कामधेनु ही संचालित हो सकी हैं।
मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी कामधेनु डेयरी योजना की स्थिति भी जिले में अच्छी नहीं है। जिले में औसतन साढे़ तीन लाख लीटर दूध की प्रतिदिन मांग है। जबकि औसतन 2.80 लाख लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। दूध की मांग और उत्पादन में अंतर के चलते विभिन्न ब्रंाड के पैकिंग वाले दूध और इससे बने उत्पादों की बिक्री भी बढ़ रही है।
जिले में 100 भैंस या गाय की कामधेनु डेयरी छह खोली जानी हैं। इनमें से बैंकों द्वारा अब तक तीन का ही ऋण स्वीकृत किया है। इनमें से भी दो ही संचालित हो सकी हैं। जिनमें भी अभी पूरे पशु नहीं हैं। इनसे 1300 लीटर दूध का प्रतिदिन उत्पादन हो रहा है। मिनी कामधेनु डेयरी पर नजर डालें तो 30 लाभार्थियों के नाम चयनित कर विभाग द्वारा बैंकों को भेज दिए गए। इनमें से आठ स्वीकृत हुए। जिनमें से चार ही अभी तक संचालित हो सकीं। इनमें भी पशुओं की संख्या कम है। इन डेयरियों में 930 लीटर दूध प्रतिदिन उत्पादन हो रहा है।
पिछले वर्ष से बढ़ा 8.685 हजार एमटी दुग्ध उत्पादन
जिले में पिछले वर्ष से इस बार 80685 हजार एमटी दूध का उत्पादन बढ़ा है। पिछले वर्ष जहां 225.579 हजार एमटी दूध का वार्षिक उत्पादन था इस वर्ष 234.264 हजार एमटी वार्षिक है।
दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। डीएम और सीडीओ के स्तर से भी कामधेनु और मिनी कामधेनु डेयरी योजना की समीक्षा की जा रही है। बैंक प्रबंधकों को पत्र भी लिखे गए हैं।
डा. योगेश कुमार सारस्वत, सीवीओ