नलकूप खराब होने से किसान परेशान
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किसानों के खेतों की सिंचाई करने के लिए जिले में 509 सरकारी नलकूप लगे हैं। कई नलकूप आज भी खराब हैं। इस कारण किसानों को सिंचाई के लिए निजी नलकूपों का सहारा लेना पड़ रहा है। जबकि नलकूप विभाग दावा कर रहा है कि सभी नलकूप चालू हालत में हैं।
नलकूप विभाग ने खेतों की सिंचाई करने के लिए जिले में 509 सरकारी नलकूप लगाए हैं। देहात क्षेत्र में अधिकांश नलकूप अभी भी खराब हालत में हैं। गर्मी के मौसम में सिंचाई के लिए पानी की खपत और ज्यादा बढ़ जाती है। सरकारी नलकूप खराब होने की स्थिति में किसानों को निजी नलकूपों का सहारा लेना पड़ता है। निजी नलकूपों से खेतों की सिंचाई करने पर किसान पर अधिक खर्चा आता है।
केस नंबर-एक
बरनाहल क्षेत्र के गांव भदौलपुर में वर्ष 2010 में सरकारी नलकूप लगाया गया था। उसके बाद से वह खराब ही चल रहा है। किसान रवींद्र सिंह का कहना है निजी नलकूपों से सिंचाई करनी पड़ती है। मनोज कुमार का कहना है कई बार शिकायतों के बाद भी आज तक नलकूप चालू नहीं कराया गया है। कर्मचारी उदासीनता बरतते हैं। केशव सिंह का कहना है अधिकारी और कर्मचारी सरकारी योजनाओं को पलीता लगा रहे हैं। किसान को सस्ती दर पर सिचाई का साधन मुहैया नहीं हो पा रहा है। दलवीर सिंह का कहना है निजी नलकूपों की सिंचाई बहुत मंहगी हो गई है। सरकारी नलकूपों की स्थिति खराब होने से किसान पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
केस नंबर-दो
औंछा क्षेत्र नगला कंचन और नगला मांझ के नलकूप कई महीनों से खराब चल रहे हैं। खेतों की सिंचाई के लिए किसान निजी नलकूपों का ही सहारा लेने का मजबूर हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत के बाद भी नलकूप सही नहीं कराए जा रहे हैं। राशिद अली का कहना है सरकारी नलकूप खराब होने से किसान पर खेती करने में और ज्यादा बोझ पड़ता है। सतेंद्र सिंह का कहना है कर्मचारी और अधिकारी पूरी मनमानी के साथ काम कर रहे हैं, जिसका खामियाजा किसानों को उठाना पड़ रहा है।
सभी सरकारी नलकूपों को चालू हालत में रखने का विभाग द्वारा प्रयास किया जाता है। भदौलपुर, नगला मांझ, नगला कंचन के सरकारी नलकूप खराब होने की जानकारी नहीं है। कर्मचारियों को वहां भेजकर उनको चालू कराया जाएगा।
लालचंद्र, अधिशासी अभियंता नलकूप